मलेरिया नियंत्रण के लिए जंगलों में पहुंचा स्वास्थ्य विभाग, संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ाई निगरानी
www.healthbhaskar.com/ रायपुर 04/08/2026. प्रदेश में वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील वन क्षेत्रों में निगरानी और नियंत्रण गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में राज्य स्तरीय अधिकारियों ने बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड और मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के दूरस्थ वन क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण कर मलेरिया नियंत्रण की तैयारियों का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अचानकमार, कोटा और अन्य वन बस्तियों में संचालित मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों का मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि जंगलों में रहने वाले परिवारों तक भी नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है, ताकि कोई भी व्यक्ति समय पर जांच और उपचार से वंचित न रहे।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्वास्थ्य अमले को सभी वन बस्तियों और वैकल्पिक आवासीय स्थलों में शत-प्रतिशत सक्रिय मलेरिया सर्विलांस चलाने, प्रत्येक परिवार की लाइन लिस्टिंग तैयार करने तथा रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट और मलेरिया रोधी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रत्येक संदिग्ध मरीज की तत्काल जांच और उपचार करने तथा संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने पर जोर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. गायत्री बांधी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुंगेली डॉ. शीला शाह, उप संचालक वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. वी.आर. भगत तथा जिला मलेरिया अधिकारियों की टीम ने सर्विलांस व्यवस्था, जांच, उपचार और मैदानी अमले की कार्यप्रणाली का विस्तृत निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने जिला एवं विकासखंड स्तर पर गठित रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) को 24×7 अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा गया है कि किसी भी क्षेत्र से मलेरिया क्लस्टर या संभावित प्रकोप की सूचना मिलने पर टीम 24 घंटे के भीतर मौके पर पहुंचकर नियंत्रण एवं रोकथाम की कार्रवाई शुरू करे।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्षा ऋतु में मलेरिया के प्रत्येक संभावित मामले पर गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है। विशेष रूप से बुखार से पीड़ित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके।
