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World Patient Safety Day: पुरानी बीमारियों में सुरक्षित इलाज के साथ सेल्फ-केयर भी जरूरी

www.healthbhaskar.com/रायपुर  17 सितम्बर 2026. हर साल 17 सितंबर को मनाया जाने वाला World Patient Safety Day इस बात पर जोर देता है कि स्वास्थ्य सेवा केवल प्रभावी नहीं, बल्कि सुरक्षित भी होनी चाहिए। इस वर्ष असंक्रामक रोगों (NCDs) से जूझ रहे मरीजों की सुरक्षित देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, कैंसर और सांस संबंधी बीमारियों में मरीजों को लंबे समय तक उपचार, दवाइयों, जांच और नियमित फॉलोअप की जरूरत होती है।

नारायणा हेल्थ एमएमआई अस्पताल, रायपुर के सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लिनिकल लीड, इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन डॉ. प्रदीप शर्मा के अनुसार, लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों में उपचार के दौरान दवा की गलती, देरी से निदान, अनियमित फॉलोअप और उपचार में लापरवाही से बचना रोगी सुरक्षा का अहम हिस्सा है।

बचाव से शुरू होती है सुरक्षित देखभाल

डॉ. शर्मा ने बताया कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई असंक्रामक रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है। संतुलित आहार में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालों को शामिल करने के साथ नमक, चीनी, संतृप्त वसा और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना जरूरी है। वयस्कों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। तंबाकू से पूरी तरह दूरी और अत्यधिक शराब से बचाव भी स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सेल्फ-केयर जरूरी, लेकिन डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं

डायबिटीज में नियमित ब्लड ग्लूकोज जांच, समय पर दवा और उचित आहार, जबकि हाई ब्लड प्रेशर में नियमित बीपी जांच, दवा और व्यायाम सेल्फ-केयर का हिस्सा हैं। हालांकि, सेल्फ-केयर का अर्थ डॉक्टर की सलाह के बिना उपचार करना नहीं है।

सीने में दर्द, सांस लेने में बढ़ती परेशानी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बेहोशी या लगातार असामान्य ब्लड शुगर और बीपी रीडिंग जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

दवाओं की पूरी जानकारी रखना जरूरी

लंबी बीमारी से जूझने वाले मरीज अक्सर कई दवाइयां लेते हैं। खासकर बुजुर्गों में अलग-अलग विशेषज्ञों की दवाओं के कारण दोहराव या दवाओं के बीच प्रतिक्रिया का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए मरीज और परिजन सभी दवाओं की अद्यतन सूची रखें और डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। बिना चिकित्सकीय सलाह दवा बंद करने, मात्रा बदलने या नई दवा शुरू करने से बचना चाहिए।

नियमित जांच और परिवार की भागीदारी अहम

हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं। ऐसे में ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज, वजन और चिकित्सक द्वारा सुझाई गई अन्य जांचों की नियमित निगरानी जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान होने से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों की देखभाल में परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। दवाओं का समय, फॉलोअप, चेतावनी संकेत और आपात स्थिति की जानकारी देखभाल करने वालों को स्पष्ट होनी चाहिए।

रीहैबिलिटेशन और पैलिएटिव केयर भी जरूरी

सुरक्षित देखभाल केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है। स्ट्रोक, हार्ट अटैक, बड़ी सर्जरी या गंभीर बीमारी के बाद फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, कार्डियक रीहैबिलिटेशन और अन्य पुनर्वास सेवाएं मरीज को दोबारा आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती हैं। गंभीर दीर्घकालिक बीमारियों में पैलिएटिव केयर दर्द और अन्य तकलीफों को नियंत्रित कर जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में सहायक हो सकती है।

डॉ. शर्मा के मुताबिक, सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा में मरीज और परिवार की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। मरीजों को अपनी दवाओं, जांच, फॉलोअप और आपात संकेतों के बारे में सवाल पूछने चाहिए। एक जागरूक मरीज, सतर्क परिवार और जिम्मेदार स्वास्थ्य व्यवस्था मिलकर टाले जा सकने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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