बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाती है अस्थमा की परेशानी? जानिए कारण और बचाव के आसान उपाय
मानसून की बारिश गर्मी से राहत जरूर दिलाती है, लेकिन अस्थमा के मरीजों के लिए यह मौसम कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दौरान बढ़ी हुई नमी, ठंडी हवा, फफूंदी, परागकण (पोलन) और वायरल संक्रमण के कारण अस्थमा के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही भी सांस लेने में गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में करीब 26 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से श्वसन नलियों में सूजन आ सकती है। वहीं बारिश के कारण हवा में फंगल स्पोर्स और पोलन कण फैल जाते हैं, जो एलर्जी और अस्थमा के मरीजों के लिए बड़ा ट्रिगर साबित होते हैं।
बारिश में क्यों बढ़ती है समस्या?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में लोग अधिक समय घर के अंदर बिताते हैं। इस दौरान घर में मौजूद धूल, फफूंदी, पालतू जानवरों के बाल और नमी भी एलर्जी को बढ़ा सकती है। इसके अलावा मौसम में बार-बार बदलाव, बढ़ती-घटती आर्द्रता और वायरल संक्रमण भी अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा देते हैं।
थंडरस्टॉर्म भी बन सकता है खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक तेज गरज-चमक और आंधी-बारिश के दौरान हवा में मौजूद परागकण छोटे-छोटे कणों में टूटकर अधिक मात्रा में फैल जाते हैं। इन्हें सांस के साथ अंदर लेने पर अचानक अस्थमा का दौरा पड़ सकता है। इसे ‘थंडरस्टॉर्म अस्थमा’ कहा जाता है। वर्ष 2016 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आए ऐसे ही एक थंडरस्टॉर्म के बाद हजारों लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- बार-बार खांसी आना
- सांस फूलना या सीने में जकड़न
- सीने में भारीपन महसूस होना
- सर्दी-जुकाम और लगातार छींक आना
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना
बारिश में ऐसे करें बचाव
विशेषज्ञ अस्थमा के मरीजों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं—
- बारिश में भीगने से बचें।
- डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और इनहेलर समय पर लें।
- घर में साफ-सफाई रखें और नमी या फफूंदी न बनने दें।
- बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें।
- ठंडी चीजों के अधिक सेवन से बचें।
- नियमित ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
- तेज खुशबू वाले परफ्यूम और डियो का इस्तेमाल कम करें।
- पालतू जानवरों और धूल-मिट्टी से दूरी बनाए रखें।
- खांसी, सांस फूलने या सीने में जकड़न बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
विशेष सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान केवल अस्थमा मरीज ही नहीं, बल्कि एलर्जी से पीड़ित लोग, बच्चे और बुजुर्ग भी विशेष सतर्क रहें। यदि सांस लेने में परेशानी लगातार बनी रहे या दवाओं के बाद भी राहत न मिले, तो बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
