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AIMSR बठिंडा में रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ अन्याय के आरोप, डीएमए ने CM, NHRC और NMC से की हस्तक्षेप की मांग

www.healthbhaskar.com चंडीगढ़/नई दिल्ली, 20 जून 2026 । डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने पंजाब के आदेश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च (AIMSR), बठिंडा में रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ कथित अन्याय, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों के उल्लंघन, स्टाइपेंड में असमानता तथा डिग्रियां रोके जाने के गंभीर आरोपों को लेकर विभिन्न संवैधानिक और सरकारी संस्थाओं से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी तथा राष्ट्रीय कोर सदस्य डॉ. आर्यन श्रीवास्तव ने इस संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को शिकायत भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

संगठन का आरोप है कि संस्थान में पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों को पंजाब के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी कम स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो NMC की स्टाइपेंड समानता नीति की भावना के विपरीत है। इसके अलावा 2021 बैच के कई पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर फरवरी 2025 में अपनी पढ़ाई पूरी करने और अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद अब तक अपनी डिग्रियां, प्रमाणपत्र तथा अन्य शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त नहीं कर सके हैं।

डीएमए ने आरोप लगाया है कि कुछ डॉक्टरों पर डिग्री प्राप्त करने के लिए शपथपत्र और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव भी बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि किसी डॉक्टर की डिग्री और प्रमाणपत्र रोकना केवल प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि यह उसके रोजगार, उच्च शिक्षा, सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण, पेशेवर पंजीकरण और आजीविका के अधिकार पर सीधा प्रभाव डालता है।

संगठन ने यह भी दावा किया कि रेजिडेंट डॉक्टरों से सप्ताह में 70 से 80 घंटे तक कार्य कराया जा रहा है, जबकि उन्हें पर्याप्त आर्थिक और संस्थागत सहयोग नहीं मिल रहा है। इससे युवा डॉक्टरों पर मानसिक, शारीरिक और पेशेवर दबाव बढ़ रहा है।

डीएमए के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों के अधिकारों की रक्षा संगठन की प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होने तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

डीएमए ने अपनी मांगों में AIMSR, बठिंडा की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, स्टाइपेंड भुगतान और NMC नियमों के अनुपालन की समीक्षा, रोकी गई सभी डिग्रियों एवं शैक्षणिक दस्तावेजों को तत्काल जारी करने, रेजिडेंट डॉक्टरों के कार्य घंटे और कार्य परिस्थितियों का ऑडिट कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं प्रबंधन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. व्यास ने कहा कि देश के मेडिकल संस्थानों को कानून, पारदर्शिता और मानवाधिकारों के दायरे में रहकर कार्य करना होगा तथा युवा डॉक्टरों के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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