15 सेंटीमीटर का विशाल एड्रिनल ट्यूमर लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकाला
उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल रायपुर के विशेषज्ञों ने की चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया, पांच साल से पेट दर्द से परेशान मरीज को मिली राहत
www.healthbhaskar.com/ रायपुर/बिलासपुर, 8 अगस्त 2026. उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल, रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने करीब 15 सेंटीमीटर आकार और 1.7 किलोग्राम वजन के विशाल नॉन-फंक्शनल एड्रिनल (सुप्रारेनल) ट्यूमर को आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जटिल मानी जाने वाली इस शल्यक्रिया के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
मरीज पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार पेट दर्द की समस्या से परेशान था। कई जगह उपचार कराने के बावजूद उसकी बीमारी का वास्तविक कारण सामने नहीं आ सका। इसके बाद उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में विस्तृत जांच, सीटी स्कैन और अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए। जांच में किडनी के ऊपर स्थित एड्रिनल ग्रंथि में विशाल ट्यूमर की पुष्टि हुई।

हार्मोनल जांच में सामने आया कि ट्यूमर नॉन-फंक्शनल है, यानी इससे हार्मोन का असामान्य स्राव नहीं हो रहा था। हालांकि, ट्यूमर का आकार बहुत बड़ा होने के कारण इसका ऑपरेशन तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। एड्रिनल ग्रंथि के आसपास महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाएं और शरीर के अन्य संवेदनशील अंग स्थित होते हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने आधुनिक उपकरणों, सटीक सर्जिकल प्लानिंग और लेप्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से ट्यूमर को सफलतापूर्वक और सुरक्षित तरीके से निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहा है। निकाले गए ट्यूमर को अंतिम पुष्टि के लिए हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए भेजा गया है।
इस चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया को लेप्रोस्कोपिक एवं गैस्ट्रो सर्जन डॉ. विनोद सिंह, यूरोसर्जन डॉ. पंकज, गैस्ट्रो सर्जन डॉ. प्रवेश तथा एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. अग्रवाल सहित विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।
डॉ. विनोद सिंह ने कहा कि लंबे समय तक रहने वाले या बार-बार होने वाले पेट दर्द को केवल गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि पेट दर्द लगातार बना रहे, पेट में गांठ महसूस हो, वजन कम होने लगे, भूख कम लगे या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समय पर सही निदान और आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से जटिल से जटिल बीमारियों का भी सुरक्षित एवं सफल उपचार संभव है।
