Fri. Jun 26th, 2026

50 दिन की जंग जीतकर नवजात को मिली नई जिंदगी, रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने किया चमत्कार

www.healthbhaskar.com/ रायपुर/रायगढ़, 26 जून 2026. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) ने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए 33 सप्ताह में जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों के सफल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उसके माता-पिता को सौंप दिया। जूटमिल, रायगढ़ निवासी ललित और सुगंधी के इस समयपूर्व जन्मे शिशु का पूरा इलाज अस्पताल में निःशुल्क किया गया।

जन्म के साथ शुरू हुई जिंदगी की जंग

महज 1.7 किलोग्राम वजन के साथ जन्मे इस नवजात को जन्म लेते ही गंभीर श्वसन संबंधी समस्या हो गई। पहले ही दिन से उसे बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) और निमोनिया जैसी जटिलताएं सामने आईं। हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने तुरंत शिशु को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा।

उपचार के दौरान कई बार रक्त और प्लाज्मा चढ़ाया गया तथा व्यापक एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं के जरिए संक्रमण पर काबू पाया गया। स्थिति में सुधार होने पर शिशु को वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (NIV) पर लाया गया। भर्ती के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफल उपचार किया गया।

जब परिजनों ने छोड़ दी उम्मीद, तब भी टीम नहीं रुकी

बाल्य एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एल.के. सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शिशु की हालत बेहद गंभीर होने के कारण उसके माता-पिता ने उम्मीद छोड़ दी और अस्पताल आना भी बंद कर दिया। इसके बावजूद NICU की टीम ने उपचार जारी रखा। लगातार प्रयासों के बाद शिशु ने दूध पीना शुरू किया, उसका वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित होने लगीं। छुट्टी के समय शिशु पूरी तरह स्थिर, दौरे-मुक्त और बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के सामान्य स्थिति में था।

50 दिनों तक दिन-रात चला उपचार

डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी के नेतृत्व में सहायक प्राध्यापक डॉ. गौरव क्लॉडियस, वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. फारूज अहमद, डॉ. पल्लवी तथा नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ ने 50 दिनों तक शिशु की लगातार निगरानी और उपचार किया। इस दौरान शिशु 23 दिन वेंटिलेटर और 17 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा।

निःशुल्क मिला लाखों रुपये का उपचार

अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गा शंकर पटेल ने बताया कि इस उपचार में रक्त, प्लाज्मा और अन्य सभी आवश्यक सुविधाओं का खर्च अस्पताल प्रबंधन ने वहन किया। निजी अस्पताल में इसी प्रकार के इलाज पर लगभग 6 से 7 लाख रुपये का खर्च आता, जबकि रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में यह पूरा उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।

वहीं, अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने NICU टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि चिकित्सकों के समर्पण, उत्कृष्ट चिकित्सकीय कौशल, सतत निगरानी और बेहतर टीमवर्क का परिणाम है, जिसने एक नन्हे जीवन को नई शुरुआत दी।

इन्हें भी पढ़े

You cannot copy content of this page