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स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना पर विवाद, डॉक्टर संगठनों ने की निरस्त करने की मांग

healthbhaskar.com रायपुर 18/06/2026। छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सेवाओं के नियमन और मरीजों की सुरक्षा को लेकर नया विवाद सामने आया है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF), जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ (JDA Chhattisgarh) और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन रायपुर (JDA Raipur) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 11 जून 2026 को जारी अधिसूचना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।

डॉक्टर संगठनों का कहना है कि यह अधिसूचना छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (CGMC) की वैधानिक और नियामक शक्तियों को प्रभावित कर सकती है। उनका मानना है कि यदि राज्य में बिना CGMC में पंजीकरण कराए चिकित्सकीय कार्य की अनुमति दी जाती है, तो इससे चिकित्सा सेवाओं की निगरानी, चिकित्सकों की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

संयुक्त बयान में संगठनों ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अधिनियम, 2019 के तहत राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर (NMR) और राज्य चिकित्सा परिषदों की भूमिकाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण होने का अर्थ यह नहीं है कि राज्य चिकित्सा परिषद की नियामक भूमिका समाप्त हो जाए। राज्य में कार्यरत प्रत्येक चिकित्सक को स्थानीय नियामक व्यवस्था के प्रति जवाबदेह होना आवश्यक है।

डॉक्टर संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि राज्य स्तरीय पंजीकरण व्यवस्था कमजोर होती है तो मरीजों की शिकायतों के निवारण, अनुशासनात्मक कार्रवाई और चिकित्सा आचार संहिता के पालन की निगरानी प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल केवल पंजीकरण करने वाली संस्था नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला महत्वपूर्ण नियामक निकाय है।

संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि 11 जून 2026 की अधिसूचना को तत्काल निरस्त किया जाए, CGMC की वैधानिक शक्तियों को यथावत रखा जाए तथा चिकित्सा नियमन से जुड़े किसी भी नीति परिवर्तन से पहले सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा की जाए।

डॉक्टर संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है। हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि चिकित्सकों और मरीजों के हितों की अनदेखी की गई तो वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आगे की रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे।

 


 

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