डॉ. सत्या आत्महत्या प्रयास मामले की जांच शुरू, बीएचयू आईएमएस पहुंची ऐपवा-आइसा फैक्ट फाइंडिंग टीम
healthbhaskar.com वाराणसी, 12 जून 2026 । बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) में सर्जरी पीजी छात्रा डॉ. सत्या द्वारा कथित आत्महत्या प्रयास के मामले की जांच अब तेज हो गई है। ऐपवा-आइसा की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने मामले की पड़ताल शुरू करते हुए आईएमएस निदेशक डॉ. एस.एन. संखवार से मुलाकात कर घटनाक्रम की जानकारी ली।
टीम ने आईसीयू में वेंटिलेटर पर उपचाररत डॉ. सत्या की स्थिति का जायजा लिया तथा चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार सिंह से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा टीम ने डॉ. सत्या के माता-पिता एस.के. चंदन और ममता श्रीवास्तव से भी मुलाकात कर घटना से जुड़ी परिस्थितियों पर चर्चा की।
जांच के दौरान कई छात्रों से बातचीत की गई। गोपनीयता की शर्त पर कुछ छात्रों ने बताया कि उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी करने का दबाव झेलना पड़ता है। वहीं कुछ मरीजों ने भी कहा कि जूनियर डॉक्टरों की अत्यधिक कार्य अवधि इलाज की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
बीएचयू में मेडिकल छात्रों पर ड्यूटी का दबाव? जांच टीम के सामने आए कई तथ्य
फैक्ट फाइंडिंग टीम के अनुसार, आईएमएस निदेशक ने मेडिकल छात्रों की लंबी ड्यूटी की बात स्वीकार की, लेकिन डॉ. सत्या को जॉइनिंग से लेकर घटना वाले दिन तक कितने घंटे ड्यूटी करनी पड़ी, इससे संबंधित डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया। निदेशक ने बताया कि मामले की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अधिकार डीन के पास है।
उल्लेखनीय है कि 13 मार्च को सर्जरी पीजी छात्रा डॉ. सत्या ने कथित तौर पर इंसुलिन की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था। वर्तमान में उनका उपचार जारी है।
जांच टीम में ऐपवा की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा, रोज़ा मैथ्यू और विभा वाही शामिल हैं, जबकि आइसा की ओर से राजेश, मिहिर और आशीष सदस्य के रूप में मौजूद रहे। टीम ने कहा है कि डॉ. सत्या की स्वास्थ्य स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर किसी उच्चस्तरीय संस्थान में उपचार की संभावना पर भी विचार किया जाना चाहिए।
फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कहा कि जांच जारी है और नए तथ्य सामने आने पर उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। साथ ही नागरिक समाज से अपील की गई है कि मामले से संबंधित किसी भी जानकारी को साझा करें, जिसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
