कॉर्पोरेट अस्पतालों में डॉक्टरों पर रेवेन्यू टारगेट का आरोप, डीएमए इंडिया ने NHRC से सुओ मोटू संज्ञान की मांग
www.healthbhaskar.com/ नई दिल्ली/05/08/2026. डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने देशभर के कॉर्पोरेट अस्पतालों में डॉक्टरों पर गैर-चिकित्सकीय प्रबंधन द्वारा राजस्व (Revenue) और व्यावसायिक प्रदर्शन (Commercial Performance) के लक्ष्य थोपे जाने के आरोपों को गंभीर बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से इस मामले में सुओ मोटू संज्ञान लेने की मांग की है।
डीएमए इंडिया ने आयोग को भेजे गए विस्तृत प्रतिनिधित्व में कहा है कि डॉक्टरों पर राजस्व आधारित लक्ष्य थोपने की प्रवृत्ति चिकित्सा नैतिकता के विरुद्ध है और इससे मरीजों के सुरक्षित, निष्पक्ष एवं साक्ष्य-आधारित उपचार के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
यह प्रतिनिधित्व डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी तथा महाराष्ट्र के कोर सदस्य डॉ. प्रांजल निबुधे के संयुक्त प्रयासों से तैयार किया गया है। संगठन ने बताया कि डॉ. प्रांजल निबुधे द्वारा पहले से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत का एसोसिएशन ने पूर्ण समर्थन करते हुए इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का निर्णय लिया है।
डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि चिकित्सा सेवा को राजस्व अर्जित करने का माध्यम बनाना न केवल चिकित्सा नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि इससे डॉक्टरों के स्वतंत्र चिकित्सकीय निर्णय भी प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के सभी निर्णय केवल मरीज के सर्वोत्तम हित में होने चाहिए, किसी वित्तीय लक्ष्य के दबाव में नहीं।
राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि डॉक्टरों पर Revenue Targets थोपना उनकी पेशेवर स्वतंत्रता पर सीधा आघात है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है और चिकित्सा व्यवस्था का मानवीय स्वरूप प्रभावित हो सकता है।
महाराष्ट्र के कोर सदस्य डॉ. प्रांजल निबुधे ने कहा कि यह केवल डॉक्टरों का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक मरीज के अधिकारों और स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस गंभीर मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करेगा।
डीएमए इंडिया की प्रमुख मांगें
मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सुओ मोटू संज्ञान ले।
देशभर के कॉर्पोरेट अस्पतालों में डॉक्टरों पर लगाए जा रहे Revenue Targets की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्वास्थ्य नियामक संस्थाओं से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाए।
डॉक्टरों की पेशेवर स्वतंत्रता और मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
चिकित्सा नैतिकता में हस्तक्षेप करने वाली जबरन व्यावसायिक एवं राजस्व आधारित नीतियों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक सिफारिशें की जाएं।
डीएमए इंडिया ने अपने प्रतिनिधित्व में कहा कि “चिकित्सा सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है। डॉक्टरों का मूल्यांकन उनके द्वारा अर्जित राजस्व से नहीं, बल्कि मरीजों को प्रदान की गई गुणवत्तापूर्ण, नैतिक एवं साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सेवा के आधार पर होना चाहिए।”
एसोसिएशन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को आश्वस्त किया है कि यदि इस विषय में किसी प्रकार की जांच या अन्य कार्रवाई प्रारंभ की जाती है, तो डीएमए इंडिया हर स्तर पर पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
