विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर रायपुर में जीवनरक्षक कौशलों का प्रदर्शन, लोगों को सिखाए CPR के गुर
www.healthbhaskar.com/रायपुर 17 अक्टूबर 2026. विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के एनेस्थीसियोलॉजी एवं पेन मेडिसिन विभाग की ओर से जनजागरूकता और शैक्षणिक गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित की गई। विभागाध्यक्ष डॉ. जया ललवानी के मार्गदर्शन में हुए इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को जीवनरक्षक कौशलों की जानकारी दी गई। साथ ही सुरक्षित शल्य चिकित्सा, दर्द नियंत्रण और मरीज की सुरक्षा में एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया।
रेलवे स्टेशन पर CPR का लाइव प्रदर्शन
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6:30 से 7:30 बजे तक रायपुर रेलवे स्टेशन पर पंचरक्षक अभियान के तहत जीवनरक्षक कौशलों के लाइव प्रदर्शन से हुई। विशेषज्ञों ने कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की तकनीक का प्रदर्शन कर लोगों को हृदय गति रुकने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में दी जाने वाली प्राथमिक सहायता की जानकारी दी।
रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और आम नागरिकों ने इस पहल में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने हैंड्स-ऑन अभ्यास के माध्यम से सीपीआर देने की बुनियादी तकनीक सीखी। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को आपातकाल में समय रहते सहायता देने और अनमोल जीवन बचाने के लिए प्रेरित करना था।
वॉकाथॉन से बताया एनेस्थीसिया का महत्व
इसके बाद चिकित्सा महाविद्यालय से नगर घड़ी चौक तक जागरूकता वॉकाथॉन निकाला गया। इसमें आईएसए स्टेट ब्रांच की अध्यक्ष डॉ. एस. दासगुप्ता, सचिव डॉ. जया ललवानी, आईएसए सिटी ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. विवेक गोयल और सचिव डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल सहित चिकित्सकों एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
वॉकाथॉन के जरिए लोगों को बताया गया कि एनेस्थीसिया केवल ऑपरेशन के दौरान बेहोशी देने तक सीमित नहीं है। यह शल्य चिकित्सा के दौरान मरीज की सुरक्षा, दर्द नियंत्रण और उपचार की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विद्यार्थियों ने पोस्टर के जरिए समझाई मरीजों की सुरक्षा
कार्यक्रम की अगली कड़ी में अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में पंचरक्षक थीम पर स्नातक विद्यार्थियों के लिए पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसकी थीम “बिफोर, ड्यूरिंग एंड बियॉन्ड सर्जरी” (Before, During and Beyond Surgery) रखी गई।
विद्यार्थियों ने पोस्टरों के माध्यम से सर्जरी से पहले, ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद मरीज की सुरक्षा में एनेस्थीसिया की भूमिका को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में पांच-पांच विद्यार्थियों के समूह बनाए गए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिक दक्षता, टीम भावना, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया विकसित करना था।
पंचरक्षक अभियान में पांच जीवनरक्षक कौशलों पर जोर
पंचरक्षक अभियान के तहत पांच प्रमुख जीवनरक्षक कौशलों को शामिल किया गया। इनमें हृदय गति रुकने पर सीपीआर, गले में बाहरी वस्तु फंसने पर चोकिंग प्रबंधन, बेहोशी की स्थिति में प्राथमिक सहायता, चोट एवं रक्तस्राव पर नियंत्रण तथा आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर गोल्डन ऑवर में उपचार सुनिश्चित करना शामिल है।
इन कौशलों के माध्यम से लोगों को आपातकालीन स्थितियों में सही समय पर उचित सहायता देने के महत्व से परिचित कराया गया। वहीं विद्यार्थियों को इन परिस्थितियों में जिम्मेदारीपूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
वरिष्ठ चिकित्सकों ने बढ़ाया विद्यार्थियों का उत्साह
इस अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय के प्रभारी डीन डॉ. एस. बी. एस. नेताम, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल, ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. वर्षा मुंगुटवार, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. निधि पांडेय और सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह उपस्थित रहीं। सभी ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों और जनजागरूकता के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में विभाग के संकाय सदस्य डॉ. प्रतीक्षा अग्रवाल, डॉ. मंजुलता टंडन, डॉ. ए. शशांक, डॉ. अमृता जैन और डॉ. शाहिदा खातून ने भी सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग प्रदान किया।
विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर आयोजित इन गतिविधियों ने जीवनरक्षक कौशलों को आमजन तक पहुंचाने और सुरक्षित चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आपातकाल में सही समय पर दी गई जीवनरक्षक सहायता किसी की जान बचा सकती है, वहीं सुरक्षित एनेस्थीसिया बेहतर शल्य चिकित्सा की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
