रायपुर में कल जुटेंगे देशभर के कैंसर विशेषज्ञ, फेफड़ों के कैंसर की जांच और आधुनिक इलाज पर होगी चर्चा
www.healthbhaskar.com/नई दिल्ली 09 अक्टूबर 2026. फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान, सटीक निदान और आधुनिक उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से क्षेत्रीय कैंसर संस्थान (RCC), रायपुर में 10 अक्टूबर को विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। ‘प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी इन लंग डायग्नोसिस एंड मैनेजमेंट’ नाम से होने वाली इस राज्यस्तरीय कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा।
कार्यशाला का मुख्य फोकस लिक्विड बायोप्सी और लंग कैंसर स्क्रीनिंग पर रहेगा। इसमें कैंसर विशेषज्ञों, पल्मोनोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट और अन्य संबंधित चिकित्सकों को आधुनिक जांच तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। आयोजन का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही कैंसर के संदिग्ध मामलों की पहचान करना और मरीजों को समय पर उचित विशेषज्ञ के पास रेफर करने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाना है।
शुरुआती जांच से समय पर इलाज पर जोर
विशेषज्ञों के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित मरीज अक्सर शुरुआत में सामान्य चिकित्सकों या चेस्ट विशेषज्ञों के पास पहुंचते हैं। ऐसे में पहली जांच के दौरान ही बीमारी के संभावित संकेतों को पहचानना और आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण होता है। सही समय पर रेफरल मिलने से मरीज को आगे की जांच और उपचार की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला का ध्येय वाक्य ‘यू सी देम फर्स्ट, मेक दैट फर्स्ट लुक काउंट’ रखा गया है। इसके तहत चिकित्सकों को फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग, मॉलिक्यूलर जांच और आधुनिक निदान तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
लिक्विड बायोप्सी से लेकर आधुनिक जांच तकनीकों तक चर्चा
कार्यशाला में फेफड़ों के कैंसर की जांच और उपचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे। इनमें लो-डोज सीटी (LDCT) स्कैन के माध्यम से स्क्रीनिंग, जांच के दौरान सामने आने वाले आकस्मिक निष्कर्षों का विश्लेषण और बायोप्सी के दौरान पर्याप्त टिश्यू सैंपल प्राप्त करने की तकनीक शामिल है।
इसके अलावा नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) में लिक्विड बायोप्सी की भूमिका, नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) रिपोर्ट का विश्लेषण और कैंसर से जुड़े आनुवंशिक बदलावों के आधार पर उपचार के चयन पर चर्चा होगी। वास्तविक मरीजों के मामलों पर आधारित केस स्टडी और पैनल डिस्कशन भी आयोजित किए जाएंगे।
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण
कार्यशाला में मुंबई के एक्ट्रेक से कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आदित्य धनावत, नई दिल्ली के आरजीसीआई से इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. भरत गुप्ता, हैदराबाद के बासवतारकम इंडो अमेरिकन कैंसर हॉस्पिटल से ऑन्कोपैथोलॉजिस्ट डॉ. डैफने फोंसेका तथा नई दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल से मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट एवं एनजीएस विशेषज्ञ डॉ. समीर अग्रवाल व्याख्यान देंगे।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक क्षेत्रीय कैंसर संस्थान, रायपुर के डीन एवं डायरेक्टर डॉ. विवेक चौधरी हैं। कार्यशाला की डायरेक्टर एवं चेयरपर्सन डॉ. मंजुला बेक, आयोजन सचिव डॉ. प्रदीप चंद्राकर और कोषाध्यक्ष डॉ. राजीव जैन हैं। आयोजन समिति के कार्यकारी सदस्यों में डॉ. दिव्या रेक्स फ्रांसिस, डॉ. उमेश देवांगन, डॉ. दीपिका नगेसिया, डॉ. निवेदिता वर्मा और डॉ. प्रभाकर गुप्ता शामिल हैं।
कार्यशाला में विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञ फेफड़ों के कैंसर के सटीक निदान, आधुनिक जांच तकनीकों और मरीजों के लिए उपयुक्त उपचार विकल्पों पर विचार-विमर्श करेंगे। इसका उद्देश्य चिकित्सकों के बीच तकनीकी जानकारी और समन्वय को मजबूत करना है, ताकि कैंसर के संदिग्ध मरीजों की पहचान से लेकर उपचार तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
