सात बार नदी पार कर तुमेरादी पहुंची स्वास्थ्य टीम, सन्नो बाई को मिला नया जीवन
www.healthbhaskar.com/रायपुर 11 अक्टूबर 2026. बस्तर के दुर्गम वनांचलों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और उफनते नदी-नाले भी स्वास्थ्यकर्मियों के हौसले को नहीं डिगा सके। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे तुमेरादी गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक ही नदी को सात बार पार कर ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाईं। इस पहल से 45 वर्षीय सन्नो बाई को नया जीवन और नई उम्मीद मिली है।
20 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर पहुंची टीम
तुमेरादी गांव उप स्वास्थ्य केंद्र मड़पुर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। चारों ओर जंगल, पहाड़ियों और नदी-नालों से घिरे इस गांव तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य दल को एक ही नदी सात बार पार करनी पड़ती है। दुर्गम रास्तों और स्वास्थ्य केंद्रों से दूरी के कारण यहां के ग्रामीणों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल होता है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए गांव पहुंची और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया। इसी शिविर में 45 वर्षीय सन्नो बाई की बीमारी का पता चला।
कुष्ठ रोग से प्रभावित हो रही थीं हाथ की उंगलियां
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान पता चला कि सन्नो बाई लंबे समय से कुष्ठ रोग से पीड़ित थीं। जागरूकता की कमी, आर्थिक तंगी और गांव की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण उनका इलाज शुरू नहीं हो पाया था। बीमारी बढ़ने से उनके हाथ की उंगलियां भी प्रभावित होने लगी थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य दल ने तत्काल पहल की और सन्नो बाई को जिला चिकित्सालय नारायणपुर पहुंचाया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनकी विस्तृत जांच की। कुष्ठ रोग की पुष्टि होने के बाद उन्हें एमडीटी (मल्टी ड्रग थेरेपी) की दवाएं उपलब्ध कराकर निःशुल्क उपचार शुरू किया गया।
समय पर इलाज से टला स्थायी विकलांगता का खतरा
चिकित्सकों ने सन्नो बाई और उनके परिवार को बीमारी से बचाव, जरूरी सावधानियों तथा नियमित दवा सेवन के महत्व की जानकारी दी। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार शुरू होने से उनके हाथ को स्थायी विकलांगता से बचाने में मदद मिली है। फिलहाल उनका उपचार जारी है और स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है।
अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की पहल
सन्नो बाई की कहानी मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के उद्देश्य और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को सामने लाती है। यह पहल बताती है कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी समय पर जांच और उपचार पहुंचाना संभव है।
स्वास्थ्य दल ने सात बार नदी पार कर न केवल एक जरूरतमंद महिला को इलाज उपलब्ध कराया, बल्कि दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा भी मजबूत किया। यह प्रयास इस संकल्प की मिसाल है कि भौगोलिक कठिनाइयां किसी भी व्यक्ति को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं रहने देंगी।
