छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर स्टाफ संकट का साया, हजारों पद खाली होने से मरीज और मेडिकल शिक्षा दोनों प्रभावित
www.healthbhaskar.com रायपुर जून 2026 . छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा मेडिकल शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं, जिससे मरीजों के उपचार के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है।
जानकारी के अनुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों में स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। सबसे अधिक संकट सीनियर रेजिडेंट्स के पदों पर है। राज्य में सीनियर रेजिडेंट्स के 518 स्वीकृत पदों में से 375 पद खाली हैं, यानी 72 प्रतिशत से अधिक पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है। इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर श्रेणी में भी लगभग आधे पद रिक्त हैं।

प्रदेश में हर वर्ष करीब 2250 एमबीबीएस डॉक्टर तैयार हो रहे हैं, लेकिन स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों की संख्या मात्र 399 है। वहीं इंटर्न डॉक्टरों को प्रतिदिन लगभग 530 रुपये मानदेय और बॉन्डेड चिकित्सकों को करीब 49 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलने के कारण युवा डॉक्टर अन्य राज्यों या निजी क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में चिकित्सा विशेषज्ञों के 1773 स्वीकृत पदों में से केवल 355 पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि लगभग 80 प्रतिशत पद रिक्त हैं। सुकमा और मोहला-मानपुर जैसे जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या शून्य बताई गई है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
17 हजार से अधिक डॉक्टर पंजीकृत, फिर भी भर्ती नहीं
छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के अनुसार राज्य में 17 हजार से अधिक डॉक्टर पंजीकृत हैं, जिनमें एमबीबीएस, एमडी, एमएस और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक शामिल हैं। इसके बावजूद वर्ष 2020 के बाद से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होने से बड़ी संख्या में योग्य डॉक्टर सरकारी व्यवस्था से बाहर हैं।
मेडिकल कॉलेजों की जमीनी स्थिति चिंताजनक
कांकेर मेडिकल कॉलेज में कई विभागों में फैकल्टी का अभाव है और कॉलेज का संचालन अलग-अलग परिसरों में हो रहा है। वहीं राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में कई विभाग बिना विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर के संचालित हो रहे हैं। रेडियोलॉजी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं।
सुधार के लिए रखे गए सुझाव
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने सरकार से सीजीपीएससी के माध्यम से नियमित भर्ती शुरू करने, सीनियर रेजिडेंट नियुक्ति अनिवार्य करने, ग्रामीण सेवा करने वाले डॉक्टरों को बोनस अंक देने, इंटर्न और बॉन्डेड डॉक्टरों के मानदेय में वृद्धि करने तथा दूरस्थ मेडिकल कॉलेजों की अधोसंरचना मजबूत करने की मांग की है।
इसके अलावा अगले 12 महीनों में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने, स्वास्थ्य बजट बढ़ाने और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार करने की भी मांग की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि योग्य डॉक्टरों की उपलब्धता के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया में देरी और संसाधनों की कमी के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा पर पड़ेगा।
