निक्षय मित्र बनकर 60 टीबी मरीजों की बने उम्मीद, जशपुर के निरंजन गुप्ता की पहल बनी मिसाल
www.healthbhaskar.com/ रायपुर/ 7 अगस्त 2026. टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने निक्षय मित्र के रूप में आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के 60 टीबी मरीजों को पोषण सहायता एवं नियमित सहयोग प्रदान कर उनके उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
टीबी मरीजों को मिला पोषण और मनोबल
विशेषज्ञों के अनुसार टीबी के इलाज में दवाइयों के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी बेहद जरूरी होता है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में निक्षय मित्र मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराने के साथ उनका मनोबल भी बढ़ाते हैं, जिससे उपचार बीच में छूटने की संभावना कम हो जाती है।
पीवीटीजी समुदाय के 19 मरीजों को लिया गोद
अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र की जिम्मेदारी संभालने वाले निरंजन प्रसाद गुप्ता ने जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) समुदाय के 19 टीबी मरीजों को गोद लिया, वहीं जिले के कुल 60 मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।
दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में पहुंचाई स्वास्थ्य सेवाएं
जशपुर के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों में टीबी की पहचान और उपचार हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता को देखते हुए मरीजों को पोषण सहायता, स्वास्थ्य परामर्श और नियमित मार्गदर्शन दिया गया, जिससे उपचार की निरंतरता बनी रही।
घर-घर पहुंचकर फैलाया जागरूकता का संदेश
निरंजन गुप्ता ने केवल पोषण किट वितरित करने तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से घर-घर जाकर मुलाकात की तथा टीबी के लक्षण, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव और पूरा उपचार करने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सतत प्रयास से समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग स्वयं जांच एवं इलाज के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने लगे।
टीबी मुक्त भारत अभियान में समाज की भागीदारी जरूरी
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल दवाइयों से नहीं जीती जा सकती। कुपोषण और टीबी एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं, इसलिए पोषण और सामाजिक सहयोग भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जशपुर की यह पहल बताती है कि यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति निक्षय मित्र बनकर आगे आए, तो टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करना और भी आसान हो सकता है।
