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जामुन की गुठली सांस की नली में फंसी, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने इमरजेंसी ब्रोंकोस्कोपी से बचाई युवक की जान

www.healthbhaskar.com रायपुर 29 जून 2026 . जामुन खाते समय उसकी गुठली गलती से सांस की नली में फंस जाने से 26 वर्षीय युवक की जान पर बन आई। गंभीर स्थिति में उसे रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल लाया गया, जहां पल्मोनोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने इमरजेंसी फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी कर गुठली को सफलतापूर्वक निकालते हुए उसकी जान बचा ली।

जानकारी के अनुसार, जामुन खाते समय युवक की सांस की नली में गुठली चली गई, जो बाएं मुख्य ब्रोंकस (लेफ्ट मेन ब्रोंकस) में फंस गई। इससे बाएं फेफड़े तक हवा का प्रवाह पूरी तरह बंद हो गया। युवक को अचानक तेज खांसी, सांस लेने में गंभीर तकलीफ और लगातार श्वसन संबंधी परेशानी होने लगी, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया।

जांच में स्थिति गंभीर पाए जाने पर पल्मोनोलॉजी विभाग की टीम ने बिना देर किए जनरल एनेस्थीसिया के तहत इमरजेंसी फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी करने का निर्णय लिया। ब्रोंकोस्कोप की सहायता से डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक गुठली को बाहर निकाल दिया। इसके बाद फेफड़े में हवा का सामान्य प्रवाह फिर शुरू हो गया और मरीज की सांस लेने में तुरंत राहत मिली। उपचार के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी विभाग के डॉ. सुशील जैन ने बताया कि सांस की नली में किसी बाहरी वस्तु का फंस जाना मेडिकल इमरजेंसी होती है। यदि समय पर उपचार नहीं मिले तो फेफड़ा बैठने, गंभीर निमोनिया, श्वसन विफलता जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से गुठली निकालने से मरीज की जान के साथ उसके फेफड़े को भी गंभीर नुकसान से बचाया जा सका।

यह जटिल प्रक्रिया डॉ. सुशील जैन के नेतृत्व में पल्मोनोलॉजी टीम ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, डीएनबी रेजिडेंट डॉक्टरों, तकनीशियनों और नर्सिंग स्टाफ के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरी की।

डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि जामुन जैसे बड़ी गुठली वाले फलों को खाते समय विशेष सावधानी बरतें। फल खाते समय बात करना, हंसना या चलते-फिरते खाना ऐसी घटनाओं का कारण बन सकता है। यदि भोजन या कोई अन्य वस्तु सांस की नली में जाने के बाद अचानक दम घुटने, लगातार खांसी, घरघराहट या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें, क्योंकि समय पर इलाज जीवन बचा सकता है।

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