सिम्स की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण, नए सत्र में प्रवेश का रास्ता साफ
www.healthbhaskar.com रायपुर 01 जुलाई 2026 . राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (यूजीएमईबी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण (लेटर ऑफ रिन्यूअल) जारी कर दिया है। इसके साथ ही आगामी शैक्षणिक सत्र में 150 विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
एनएमसी की यह स्वीकृति सिम्स में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक अधोसंरचना, अनुभवी संकाय और मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि मानी जा रही है। यह संस्थान द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के सफल अनुपालन और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण भी है।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि सिम्स को मध्य भारत के अग्रणी चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नए सत्र में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, आधुनिक अधोसंरचना और उत्कृष्ट नैदानिक प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उन्होंने बताया कि सिम्स चिकित्सालय बिलासपुर संभाग का सबसे बड़ा शासकीय चिकित्सा संस्थान है, जहां प्रतिदिन लगभग दो से ढाई हजार मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं, जबकि करीब 900 मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती रहकर उपचार प्राप्त करते हैं।
संस्थान में 24 घंटे संचालित ब्लड बैंक, अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर तथा विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों के माध्यम से उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बड़ी संख्या में मरीजों के उपचार से मेडिकल विद्यार्थियों को बेहतर व्यावहारिक एवं नैदानिक प्रशिक्षण मिलता है।
सिम्स प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में शामिल है। यहां थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों को निःशुल्क रक्त एवं उपचार की सुविधा दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्थान ने 10,043 यूनिट रक्त संग्रह कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की थी।
संस्थान प्रबंधन का कहना है कि 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, दक्ष चिकित्सकों के निर्माण और आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
