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चिरायु टीम की सतर्कता से तीन बच्चों को मिला नया जीवन, जन्मजात हृदय रोग की समय पर हुई पहचान

www.healthbhaskar.com/रायपुर ,14 अगस्त 2026. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और बीमारियों की समय पर पहचान के प्रयासों से धमतरी जिले के तीन परिवारों को बड़ी राहत मिली है। चिरायु टीम-बी मगरलोड की सतर्कता से जन्मजात हृदय रोग (CHD) से पीड़ित तीन बच्चों की समय रहते पहचान की गई और उन्हें विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया गया।

स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टीम ने केरिना कंवर (15 वर्ष), कुमकुम साहू (3 वर्ष) और युवेश कमार (9 वर्ष) में जन्मजात हृदय रोग के संभावित लक्षण पाए। टीम ने बिना देरी किए तीनों बच्चों को आवश्यक जांच एवं विशेषज्ञ उपचार के लिए रायपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर किया। साथ ही उपचार प्रक्रिया के दौरान आवश्यक समन्वय और फॉलोअप भी सुनिश्चित किया।

अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक जांच और परीक्षण किए। जांच में जन्मजात हृदय संबंधी समस्या की पुष्टि होने के बाद चिकित्सकों ने तीनों बच्चों के लिए सर्जिकल उपचार की आवश्यकता बताई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में तीनों बच्चों का सफल ऑपरेशन किया गया। उपचार के बाद बच्चों के स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार हुआ और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।

उपचार के बाद भी जारी है फॉलोअप

चिरायु टीम की भूमिका केवल बीमारी की पहचान और रेफरल तक सीमित नहीं रही। टीम ने बच्चों को उचित स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने, उपचार के लिए समन्वय करने और ऑपरेशन के बाद उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने का कार्य भी जारी रखा है।

जन्मजात हृदय रोग के लक्षण कई बार शुरुआती अवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान संभावित लक्षणों की पहचान गंभीर जटिलताओं को रोकने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। चिरायु कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग कर उन्हें आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।

तीनों बच्चों का सफल उपचार उनके परिवारों के लिए राहत और खुशी का कारण बना है। यह मामला समय पर स्वास्थ्य जांच, बीमारी की प्रारंभिक पहचान, त्वरित रेफरल, विशेषज्ञ उपचार और सतत फॉलोअप के प्रभावी समन्वय का उदाहरण है।

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