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जागरूकता से बदली तस्वीर, बस्तर में 83% घटा मलेरिया

www.healthbhaskar.com/रायपुर ,12 अगस्त 2026. बस्तर में मलेरिया के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की मुहिम अब केवल दवा और जांच तक सीमित नहीं है। जंगलों और दूरस्थ इलाकों में बसे गांवों में लोगों को मच्छरदानी के नियमित इस्तेमाल, बुखार होने पर तत्काल जांच और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे इन प्रयासों का असर यह हुआ है कि पिछले 10 वर्षों में बस्तर में मलेरिया के मामलों में करीब 83 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

स्थानीय भाषा और परंपराओं को बनाया जागरूकता का माध्यम

मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने के साथ लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव पर भी जोर दिया जा रहा है। संभाग की बड़ी जनजातीय आबादी तक प्रभावी तरीके से संदेश पहुंचाने के लिए स्थानीय भाषा, परंपराओं और समुदाय में प्रभाव रखने वाले लोगों को जागरूकता अभियान से जोड़ा गया है।

स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि मलेरिया से बचाव की जानकारी ऐसी भाषा और तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिसे ग्रामीण आसानी से समझ सकें और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपना सकें।

बैगा-गुनिया और सिरहा भी बने जागरूकता अभियान की कड़ी

इसी रणनीति के तहत बैगा-गुनिया और सिरहा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। समुदाय में प्रभाव रखने वाले इन लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी देकर जागरूकता अभियान से जोड़ा जा रहा है।

सम्मेलनों में स्थानीय भाषा और संवाद शैली के जरिए ग्रामीणों को नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, बुखार आने पर तुरंत जांच कराने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

बुखार को नजरअंदाज न करने की अपील

स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों को लगातार समझा रहा है कि बुखार को सामान्य मानकर घर पर इंतजार करना नुकसानदायक हो सकता है। समय पर जांच कराने से मलेरिया की जल्द पहचान हो जाती है और उपचार भी तुरंत शुरू किया जा सकता है।

इसके साथ ही सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल मलेरिया से बचाव का आसान और प्रभावी तरीका बताया जा रहा है। मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मितानिनें घर-घर संपर्क कर यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं कि मच्छरदानी केवल घर में रखी न रहे, बल्कि रात में उसका नियमित इस्तेमाल हो।

बुखार की निगरानी और जांच व्यवस्था मजबूत

मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में बुखार की निगरानी और जांच व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। ग्रामीणों को घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय बुखार आने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करने और जांच कराने की सलाह दी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की रणनीति में बचाव, समय पर जांच और तत्काल उपचार को एक साथ जोड़ने पर जोर है। विभाग का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी और व्यवहार में बदलाव से बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण हासिल किया जा सकता है।

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