सोशल मीडिया की सलाह पर विटामिन डी लेना पड़ सकता है भारी, दिल और किडनी को हो सकता है नुकसान
www.healthbhaskar.com 25 जून 2026 . सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी वीडियो और सलाहों के बढ़ते प्रभाव के बीच विटामिन डी सप्लीमेंट का अनियंत्रित उपयोग लोगों की सेहत के लिए खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के लंबे समय तक विटामिन डी की दवाइयों का सेवन हृदय और किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव डाल सकता है।
हाल ही में एक निजी अस्पताल में 54 वर्षीय महिला तेज धड़कन की शिकायत लेकर पहुंची। जांच में उसका विटामिन डी स्तर 140 पाया गया, जो सामान्य सीमा से काफी अधिक था। पूछताछ में सामने आया कि महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखने के बाद स्वयं ही विटामिन डी की दवा लेना शुरू कर दिया था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन डी शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा उतनी ही खतरनाक हो सकती है जितनी इसकी कमी। कई लोग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर मिली सलाह के आधार पर महीनों तक सप्लीमेंट लेते रहते हैं, जबकि इसकी खुराक और सेवन की अवधि व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है। जब इसकी मात्रा जरूरत से अधिक हो जाती है तो रक्त में कैल्शियम का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिसे हाइपरकैल्सीमिया कहा जाता है। इससे धमनियों और हृदय के वाल्वों में कैल्शियम जमा होने लगता है, जिससे रक्त वाहिकाएं सख्त हो सकती हैं। लंबे समय में उच्च रक्तचाप, अनियमित हृदय गति, हार्ट फेलियर और हृदयाघात का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक विटामिन डी की ओवरडोज का असर किडनी पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है। अतिरिक्त कैल्शियम किडनी में जमा होकर पथरी बनने का कारण बनता है। गंभीर मामलों में किडनी की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है और स्थायी नुकसान की आशंका रहती है।
डॉक्टरों का कहना है कि कई युवा, जो लंबे समय तक एसी वातावरण में काम करते हैं, केवल अनुमान के आधार पर विटामिन डी की दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं, जो जोखिम भरा हो सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार विटामिन डी की कमी होने पर थकान, मांसपेशियों में दर्द, हड्डियों की कमजोरी और बार-बार फ्रैक्चर जैसी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि केवल रक्त जांच के माध्यम से ही की जानी चाहिए। कमी पाए जाने पर चिकित्सक उम्र, वजन, बीमारी और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित खुराक निर्धारित करते हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों को लगातार उल्टी या मतली, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, कमजोरी, भ्रम की स्थिति, मांसपेशियों में दर्द और किडनी स्टोन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का विटामिन या सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता अच्छी बात है, लेकिन सोशल मीडिया की सलाह को अंतिम सत्य मानकर दवाइयों का सेवन करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
