Wed. Jul 8th, 2026

90 साल की महिला को मिली नई जिंदगी: छत्तीसगढ़ में पहली बार जटिल एओर्टिक एन्यूरिज्म का सफल EVAR ऑपरेशन

एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल की बड़ी उपलब्धि, 64 मिमी एओर्टिक एन्यूरिज्म का बिना ओपन सर्जरी सफल इलाज

www.healthbhaskar.com रायपुर 08 जुलाई 2026. छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने 90 वर्षीय महिला के जटिल एओर्टिक एन्यूरिज्म (Aortic Aneurysm) का सफलतापूर्वक इलाज कर उन्हें नई जिंदगी दी है। अस्पताल के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीज पर इस प्रकार का एंडोवैस्कुलर एओर्टिक एन्यूरिज्म रिपेयर (EVAR) पहली बार सफलतापूर्वक किया गया है।

पेट दर्द की जांच में सामने आई जानलेवा बीमारी

अस्पताल पहुंची महिला को लगातार पेट दर्द की शिकायत थी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उनकी महाधमनी (एओर्टा) के निचले हिस्से में 64 मिमी का बड़ा एन्यूरिज्म विकसित हो चुका था, जिसमें रक्त का थक्का भी मौजूद था। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह एन्यूरिज्म फट जाता तो मरीज की जान बचाना लगभग असंभव हो जाता।

90 साल की उम्र ने बढ़ाई चुनौती

यह मामला इसलिए भी बेहद जटिल था क्योंकि मरीज की रक्तवाहिनियां अत्यधिक घुमावदार थीं और किडनी व आंतों तक रक्त पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण धमनियां एन्यूरिज्म के बेहद करीब स्थित थीं। इसके अलावा मरीज पहले से हृदय संबंधी समस्याओं से भी जूझ रही थीं। ऐसे में पारंपरिक ओपन सर्जरी करना अत्यधिक जोखिम भरा था।

आधुनिक तकनीक से किया सफल उपचार

विशेषज्ञों ने न्यूनतम इनवेसिव तकनीक EVAR को उपचार का सबसे सुरक्षित विकल्प चुना। 26 जून 2026 को डॉक्टरों की टीम ने विशेष “रिवर्स स्लाइडिंग तकनीक” और 168 मिमी एंडोवैस्कुलर स्टेंट ग्राफ्ट का उपयोग करते हुए करीब 4 घंटे 20 मिनट में यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। सबसे बड़ी सफलता यह रही कि एन्यूरिज्म को सुरक्षित किया गया और किडनी व आंतों तक रक्त प्रवाह भी पूरी तरह सामान्य बनाए रखा गया।

चार दिन में अस्पताल से मिली छुट्टी

ऑपरेशन के दौरान किसी प्रकार की जटिलता नहीं आई। मरीज की स्थिति लगातार स्थिर रही और सफल उपचार के बाद उन्हें 29 जून को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

विशेषज्ञों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. सुमंताशेखर पाढ़ी, वरिष्ठ सलाहकार एवं क्लीनिकल लीड (हृदय रोग) ने किया। वहीं डॉ. मोहम्मद वसीम खान ने कार्डियोवैस्कुलर सर्जन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन के दौरान मरीज को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी डॉ. अरुण अंडप्पन और डॉ. स्नेहा खोबरागड़े ने संभाली।

अस्पताल ने बताया बड़ी उपलब्धि

एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर तपानी घोष ने कहा कि यह सफलता अस्पताल की विशेषज्ञ टीम की दक्षता, आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों की मदद से अब अधिक उम्र के मरीजों का भी सुरक्षित और प्रभावी इलाज संभव हो रहा है।

यह उपलब्धि न केवल एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

इन्हें भी पढ़े

You cannot copy content of this page