‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ से नहीं, नियमित वॉकिंग से ज्यादा जरूरी है एक्टिव रहना
फिट रहने के लिए रोजाना पैदल चलना सबसे आसान गतिविधियों में शामिल है। इन दिनों सोशल मीडिया पर ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ नाम का वेलनेस ट्रेंड चर्चा में है। इसमें धीमी और नियंत्रित चाल के साथ लयबद्ध सांस, पोस्चर में बदलाव और हल्की एक्सरसाइज शामिल की जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर को सक्रिय रखने से लिम्फैटिक सिस्टम को काम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन सामान्य वॉकिंग की तुलना में ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ को ज्यादा प्रभावी बताने के लिए ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
क्या है लिम्फैटिक वॉकिंग
‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ की कोई निश्चित मेडिकल परिभाषा नहीं है। आम तौर पर इससे ऐसी हल्की और लयबद्ध गतिविधियों को समझा जाता है, जिनसे लिम्फ के प्रवाह में मदद मिल सके। रक्त संचार की तरह लिम्फैटिक सिस्टम में दिल जैसा कोई केंद्रीय पंप नहीं होता। मांसपेशियों का सिकुड़ना, सांस लेने के दौरान शरीर में दबाव का बदलाव और शारीरिक गतिविधियां लिम्फ के प्रवाह में योगदान करती हैं।
लिम्फैटिक सिस्टम क्यों जरूरी
लिम्फैटिक सिस्टम शरीर में अतिरिक्त टिशू फ्लूइड को इकट्ठा कर उसे रक्तप्रवाह में वापस पहुंचाने का काम करता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। लिम्फ नोड्स संभावित हानिकारक पदार्थों को फिल्टर करने में मदद करते हैं। लिम्फ के ड्रेनेज में रुकावट होने पर टिशू में तरल जमा हो सकता है, जिससे लिम्फेडेमा जैसी सूजन हो सकती है।
सामान्य वॉकिंग भी करती है मदद
चलने के दौरान पैरों और शरीर की मांसपेशियों की गतिविधि लिम्फ के परिवहन में मदद कर सकती है। लिम्फेडेमा से जुड़े अध्ययनों में एक्सरसाइज से लक्षणों और शारीरिक कार्यक्षमता में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं, हालांकि उपलब्ध प्रमाणों की निश्चितता अलग-अलग है। वॉकिंग कम प्रभाव वाली और आसानी से रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल की जा सकने वाली गतिविधि है।
सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए इसके फायदे लेने के लिए किसी विशेष ‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ तकनीक की जरूरत नहीं मानी जाती। नियमित रूप से सक्रिय रहना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
सूजन को सिर्फ वॉकिंग से न करें नजरअंदाज
व्यायाम शरीर में फ्लूइड के संचार में मदद कर सकता है, लेकिन हर तरह की सूजन लिम्फेडेमा नहीं होती। लंबे समय तक बैठे रहना, कुछ दवाएं, नसों की समस्या तथा हृदय या किडनी से जुड़ी स्थितियां भी सूजन का कारण बन सकती हैं। इसलिए लगातार रहने वाली, बिना स्पष्ट कारण की या शरीर के केवल एक हिस्से में होने वाली सूजन को सिर्फ वॉकिंग से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
जिन लोगों को पहले से लिम्फेडेमा है, उनके लिए विशेषज्ञ की सलाह से तैयार किया गया एक्सरसाइज प्रोग्राम उपयोगी हो सकता है। कुछ मामलों में कम्प्रेशन और अन्य उपचार भी शामिल किए जाते हैं।
वजन घटाने में भी कोई खास बढ़त नहीं
‘लिम्फैटिक वॉकिंग’ से सामान्य वॉकिंग की तुलना में तेजी से वजन घटने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। वजन प्रबंधन में खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद, मांसपेशियों और कुल ऊर्जा खर्च सहित कई कारक भूमिका निभाते हैं। ज्यादा तेज या अधिक समय तक की वॉकिंग आमतौर पर धीमी चाल की तुलना में अधिक ऊर्जा खर्च करा सकती है।
हालांकि, जो लोग अभी शारीरिक गतिविधि शुरू कर रहे हैं, बीमारी से उबर रहे हैं या तेज व्यायाम नहीं कर सकते, उनके लिए हल्की वॉकिंग भी अच्छी शुरुआत हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात ऐसी गतिविधि चुनना है जिसे सुरक्षित रूप से और नियमित रूप से जारी रखा जा सके।
