सांस फूलती थी, धड़कन बढ़ जाती थी… दिल में मिला छेद, बिना ओपन हार्ट सर्जरी के हुआ इलाज
www.healthbhaskar.com/रायपुर 09 सितम्बर 2026. जशपुर जिले के छोटे से गांव जैकुदर की 8 वर्षीय स्वर्णि बाई अब सामान्य जिंदगी की ओर लौट रही है। लंबे समय से सांस लेने में परेशानी, बार-बार छाती में संक्रमण और तेज धड़कन से जूझ रही स्वर्णि के दिल में जन्मजात विकार का पता चला। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत हुई जांच, समय पर रेफरल और विशेषज्ञ उपचार से उसका बिना ओपन हार्ट सर्जरी के सफल इलाज किया गया।
दुलदुला विकासखंड के जैकुदर गांव की प्राथमिक शाला में पढ़ने वाली स्वर्णि की स्वास्थ्य जांच के दौरान हृदय संबंधी बीमारी सामने आई। विशेषज्ञ जांच में उसके हृदय में Large Type-A PDA (Patent Ductus Arteriosus) पाया गया। PDA का आकार करीब 5.4 मिलीमीटर था, जिसके कारण हृदय में रक्त का असामान्य प्रवाह हो रहा था। बेहतर उपचार के लिए उसे रायपुर के निजी अस्पताल रेफर किया गया।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक जांच की। मरीज की स्थिति को देखते हुए ओपन हार्ट सर्जरी के बजाय कैथेटर के जरिए डिवाइस क्लोजर करने का निर्णय लिया गया। प्रक्रिया के दौरान 8/10 mm Lifetech Heart R PDA Occluder की मदद से PDA को सफलतापूर्वक बंद किया गया।
प्रक्रिया के बाद की जांच में डिवाइस सही स्थिति में मिला। किसी तरह का लीकेज या रेजिडुअल शंट नहीं पाया गया और हृदय की कार्यक्षमता भी सामान्य रही। स्थिति संतोषजनक होने पर स्वर्णि को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
समय पर जांच ने बदली जिंदगी
स्वर्णि का मामला बताता है कि बच्चों में बार-बार छाती में संक्रमण, सांस फूलना, जल्दी थकान या असामान्य रूप से तेज धड़कन जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चिरायु जैसी स्वास्थ्य जांच योजनाओं के जरिए समय पर बीमारी की पहचान, उचित रेफरल और विशेषज्ञ उपचार से जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों को स्वस्थ और सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिल सकती है।
