PMOS के बावजूद बन सकती हैं मां, सही इलाज से बढ़ती है गर्भधारण की संभावना
www.healthbhaskar.com/रायपुर 12 सितम्बर 2026. PMOS यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मां बनना संभव नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सही उपचार, संतुलित खान-पान और जीवनशैली में बदलाव से गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।
PMOS को पहले PCOS के नाम से जाना जाता था।
इसमें हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड अनियमित होना, ओव्यूलेशन में परेशानी, वजन बढ़ना और बाल झड़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। देशभर में किए गए अध्ययन में प्रजनन आयु की करीब हर पांचवीं महिला में यह समस्या पाई गई।
गर्भधारण में सबसे बड़ी चुनौती अनियमित ओव्यूलेशन होती है। वजन अधिक होने पर करीब 5 से 10 प्रतिशत तक कमी भी अंडोत्सर्जन को बेहतर करने में मदद कर सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर लेट्रोज़ोल, क्लोमीफीन या मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं दे सकते हैं। दवाओं का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।
यदि सामान्य उपचार से सफलता न मिले तो IVF समेत अन्य असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) विकल्प भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि PMOS लंबे समय तक रहने वाली स्थिति है।
इसलिए गर्भावस्था से पहले और बाद में वजन, ब्लड शुगर, खान-पान और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना जरूरी है।
