सिम्स के डॉक्टरों ने बचाई 15 वर्षीय किशोर की जान, चाकू के गंभीर हमले के बाद सफल ऑपरेशन
https://www.healthbhaskar.com बिलासपुर 24/07/2026. छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के चिकित्सकों ने त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और विशेषज्ञ उपचार के दम पर चाकू के हमले में गंभीर रूप से घायल 15 वर्षीय किशोर की जान बचा ली।
समय पर की गई जटिल शल्य चिकित्सा और आईसीयू में सतत निगरानी के चलते अब किशोर पूरी तरह खतरे से बाहर है। इस सफल उपचार ने सिम्स के डॉक्टरों की दक्षता और समर्पित स्वास्थ्य सेवाओं को एक बार फिर साबित किया है।
जानकारी के अनुसार, सिरगिट्टी निवासी 15 वर्षीय किशोर पर 11 जुलाई की शाम करीब 8:30 बजे चाकू से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल किशोर को रात लगभग 9 बजे सिम्स के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि चाकू का वार पेट और छाती के महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंच गया था। पेट की दीवार फटने से छोटी आंत बाहर निकल आई थी, जबकि छाती में गहरी चोट के कारण फेफड़ों पर दबाव बन गया था, जिससे मरीज को सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो रही थी।
चिकित्सकों के अनुसार छोटी आंत में कई स्थानों पर छेद हो गए थे, जिससे पेरिटोनाइटिस, सेप्सिस और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जानलेवा जटिलताओं का खतरा उत्पन्न हो गया था। ऐसे मामलों में हर मिनट मरीज के जीवन के लिए बेहद अहम होता है।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग की टीम को तत्काल सक्रिय किया गया। वरिष्ठ सर्जन डॉ. बृजेश पटेल के नेतृत्व में आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन टीम में डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह, डॉ. शुभा एक्का, डॉ. रवि राजवाड़े और पीजी रेजिडेंट डॉ. कुणाल शामिल रहे। वहीं, ऑपरेशन थिएटर में ओटी सिस्टर अंजिता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
करीब कई घंटे चली जटिल शल्य चिकित्सा के दौरान छोटी आंत के कई स्थानों पर हुए छेदों की सफलतापूर्वक मरम्मत की गई। साथ ही पेट की गुहा में जमा रक्त निकालकर आंतरिक रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया।
चिकित्सकों का कहना है कि यदि मरीज को समय पर अस्पताल नहीं लाया जाता और तत्काल ऑपरेशन नहीं किया जाता, तो उसकी जान बचाना बेहद मुश्किल हो सकता था।
ऑपरेशन के बाद मरीज को एनेस्थीसिया विभाग के आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में सहायक प्रोफेसर डॉ. अपर्णा मिश्रा एवं पीजी रेजिडेंट्स की टीम ने 24 घंटे लगातार निगरानी रखी। वेंटिलेटर सपोर्ट, संक्रमण नियंत्रण और प्रभावी दर्द प्रबंधन के चलते मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उसे सर्जरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
सिम्स प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में किशोर की हालत स्थिर है और वह पूरी तरह खतरे से बाहर है। इस सफल उपचार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आपातकालीन परिस्थितियों में सिम्स बिलासपुर की चिकित्सा टीम त्वरित निर्णय, आधुनिक उपचार पद्धति और टीमवर्क के बल पर गंभीर मरीजों को नया जीवन देने में सक्षम है।
