स्थानीय डॉक्टरों के समर्थन में रायपुर में ऐतिहासिक कैंडल मार्च, अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर बुलंद हुई आवाज
www.healthbhaskar.com रायपुर 20 जून 2026 । छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर में अपनी एकजुटता का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (जेएनएम मेडिकल कॉलेज) परिसर में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर, JDA छत्तीसगढ़ एवं छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के संयुक्त तत्वावधान में विशाल एवं शांतिपूर्ण कैंडल मार्च का आयोजन किया गया।
इस दौरान बड़ी संख्या में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट्स, सीनियर रेजिडेंट्स, सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों और अन्य चिकित्सकों ने भाग लेकर अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई।
हाथों में मोमबत्तियां और मांगों से जुड़े संदेश लिए डॉक्टरों ने परिसर में मार्च निकालकर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों की एकजुटता और अनुशासन देखने को मिला।
स्टाइपेंड वृद्धि और स्थानीय डॉक्टरों के हितों की मांग
कैंडल मार्च में शामिल डॉक्टरों ने इंटर्न, पीजी, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तत्काल और सम्मानजनक वृद्धि की मांग की। साथ ही सुपरस्पेशलिटी कैडर के गठन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
इसके अलावा राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग संबंधी निर्णय को वापस लेने तथा छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के भविष्य, रोजगार के अवसरों और चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
स्वास्थ्य विभाग के फैसलों पर जताई चिंता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से चिकित्सकों की जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंटर्न से लेकर सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों तक सभी वर्गों को उचित सम्मान और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।
डॉक्टरों ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी उस आदेश पर भी चिंता जताई, जिसमें अन्य राज्यों के चिकित्सकों को बिना स्थानीय पंजीयन प्रक्रिया के कार्य करने की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई है। उनका कहना है कि इस निर्णय से प्रदेश के युवा डॉक्टरों के रोजगार और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
“यह केवल स्टाइपेंड नहीं, भविष्य की लड़ाई”
मार्च में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि यह आंदोलन केवल वेतन या स्टाइपेंड बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य, स्थानीय युवाओं के अवसरों और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय नहीं लेती है, तो आगे व्यापक आंदोलन की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।
गूंजे अधिकारों से जुड़े नारे
कैंडल मार्च के दौरान परिसर में “हमारा हक – हमारी आवाज – हमारा भविष्य”, “सेव लोकल डॉक्टर्स, सेव आवर फ्यूचर” और “रिस्पेक्ट आवर वर्क, रिस्पेक्ट आवर राइट्स” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। चिकित्सकों ने कहा कि एकजुट होकर संघर्ष करने से ही समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है।
डॉक्टरों की एकता का बड़ा संदेश
CGDF और JDA के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सक समुदाय के सम्मान, अधिकारों और भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने राज्य सरकार से संवाद स्थापित कर चिकित्सकों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील की।
चिकित्सकों का कहना है कि रायपुर में आयोजित यह कैंडल मार्च छत्तीसगढ़ के चिकित्सा इतिहास में डॉक्टरों की एकता और जागरूकता का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है। बड़ी संख्या में डॉक्टरों की सहभागिता ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश का चिकित्सा समुदाय अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए संगठित है और जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
