लगातार सूखी खांसी और सीढ़ियां चढ़ने पर फूलती है सांस? फेफड़ों की गंभीर बीमारी IPF का हो सकता है संकेत
सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, लगातार सूखी खांसी रहना या थोड़ी-सी शारीरिक गतिविधि के बाद थकान महसूस होना आम समस्या लग सकती है। कई बार लोग इन लक्षणों को बढ़ती उम्र, मौसम में बदलाव, एलर्जी या कमजोरी से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या धीरे-धीरे बढ़ने लगें, तो सावधान होने की जरूरत है। इनके पीछे इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) जैसी गंभीर फेफड़ों की बीमारी भी हो सकती है।
क्या है इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस?
इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस फेफड़ों से जुड़ी एक क्रॉनिक इंटरस्टीशियल लंग डिजीज है। इसमें फेफड़ों के अंदर मौजूद टिशू में धीरे-धीरे असामान्य स्कारिंग यानी निशान बनने लगते हैं। इसके कारण फेफड़ों के ऊतक मोटे और सख्त हो सकते हैं, जिससे रक्त में ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। बीमारी बढ़ने के साथ व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
इस बीमारी में ‘इडियोपैथिक’ का अर्थ है कि इसके सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, हर मरीज में बीमारी की गति एक जैसी नहीं होती। कुछ लोगों में यह धीरे-धीरे बढ़ती है, जबकि कुछ में फेफड़ों की कार्यक्षमता अपेक्षाकृत तेजी से प्रभावित हो सकती है।
सूखी खांसी और सांस फूलना प्रमुख लक्षण
आईपीएफ के शुरुआती लक्षण सामान्य होने के कारण कई बार इनकी पहचान देर से हो पाती है। लगातार सूखी खांसी और शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस फूलना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों में असामान्य थकान, तेजी से सांस चलना और बिना स्पष्ट कारण वजन कम होने जैसी समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति पहले आसानी से दो-तीन मंजिल सीढ़ियां चढ़ लेता था, लेकिन अब एक मंजिल चढ़ने पर ही उसकी सांस फूलने लगती है, तो इस बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसी तरह रोजमर्रा के काम करते समय सांस लेने में परेशानी बढ़ना भी चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।
फेफड़ों में कैसे बढ़ती है परेशानी?
स्वस्थ फेफड़ों में मौजूद छोटी-छोटी वायु थैलियों, जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है, के माध्यम से ऑक्सीजन रक्त में पहुंचती है। आईपीएफ में इन वायु थैलियों के आसपास के ऊतकों में फाइब्रोसिस यानी स्कार टिशू विकसित होने लगता है। इससे फेफड़ों का लचीलापन कम हो सकता है और ऑक्सीजन का आदान-प्रदान प्रभावित होता है।
शुरुआत में व्यक्ति को तेज चलने, व्यायाम करने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने की समस्या हो सकती है। बीमारी बढ़ने पर कम शारीरिक गतिविधि के दौरान भी सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण थकान और कमजोरी भी बढ़ सकती है।
दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते हैं लक्षण
आईपीएफ की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण कई दूसरी बीमारियों में भी दिखाई देते हैं। अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), हृदय संबंधी समस्याएं, श्वसन संक्रमण और अन्य इंटरस्टीशियल लंग डिजीज में भी सांस फूलने या खांसी की परेशानी हो सकती है। एसिड रिफ्लक्स और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव भी लगातार खांसी का कारण बन सकते हैं।
इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर आईपीएफ की पुष्टि नहीं की जा सकती। चिकित्सक मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत के अनुसार फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच, हाई-रिजॉल्यूशन सीटी (HRCT) स्कैन तथा अन्य परीक्षणों की मदद से बीमारी का मूल्यांकन कर सकते हैं।
लक्षण बढ़ने पर विशेषज्ञ से कराएं जांच
लगातार बनी रहने वाली सूखी खांसी, बढ़ती सांस फूलने की समस्या और असामान्य थकान को सामान्य मानकर लंबे समय तक टालना उचित नहीं है। ये लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इनके पीछे आईपीएफ जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है।
ऐसे लक्षण लगातार बने रहने या बढ़ने पर फेफड़ों के विशेषज्ञ यानी पल्मोनोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच से बीमारी की स्थिति समझने और उपलब्ध उपचार विकल्पों पर उचित निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। यदि सांस लेने में अचानक गंभीर परेशानी हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
