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नीट-पीजी 2026 में पारदर्शिता की मांग, डीएमए ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका

www.healthbhaskar.com/रायपुर  06 अक्टूबर 2026. नीट-पीजी 2026 की परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थी स्तर पर सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग को लेकर डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत केंद्र सरकार, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के खिलाफ रिट याचिका दायर की है।

Democratic Medical Association Vs Union of India & Others नाम से दायर इस मामले की डायरी संख्या 61605/2026 है और याचिका 1 अक्टूबर 2026 को दाखिल की गई। डीएमए की ओर से यह याचिका लीगल सेल फॉर डॉक्टर्स, एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड नीमा के माध्यम से दाखिल की गई है।

नीट-पीजी 2026 की परीक्षा 30 अगस्त को आयोजित हुई थी, जबकि परिणाम 24 सितंबर को जारी किया गया। डीएमए का कहना है कि परीक्षा में कुछ अंकों का अंतर भी अभ्यर्थी की रैंक और पोस्टग्रेजुएट सीट के विकल्प को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में अभ्यर्थियों को अपने प्राप्त अंकों के आधार को सत्यापित करने का अवसर मिलना जरूरी है।

हर अभ्यर्थी को मिले अपने परीक्षा रिकॉर्ड की जानकारी

डीएमए ने मांग की है कि प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए सुरक्षित और व्यक्तिगत सत्यापन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। इसके तहत अभ्यर्थी को परीक्षा में उसके सामने आए वास्तविक प्रश्न और विकल्प, उसके द्वारा दर्ज किए गए उत्तर, आधिकारिक उत्तर कुंजी तथा प्रत्येक प्रश्न के आधार पर दिए गए अंकों की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

संगठन ने संपूर्ण परीक्षा रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराने और आपत्ति दर्ज करने के लिए निर्धारित समय-सीमा वाली ऑब्जेक्शन विंडो की भी मांग की है। यदि किसी परीक्षा संबंधी त्रुटि की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर अंक या रैंक में सुधार की व्यवस्था किए जाने की मांग भी याचिका में शामिल है।

‘पुनर्मूल्यांकन नहीं, सत्यापन की मांग’

डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास ने कहा कि नीट-पीजी हजारों युवा डॉक्टरों के लिए करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया केवल पारदर्शी होने के बजाय ऐसी होनी चाहिए, जिसे अभ्यर्थी स्वयं सत्यापित कर सके।

एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने कहा कि याचिका सामूहिक पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं करती, बल्कि ऐसी जानकारी उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखती है, जिससे प्रत्येक अभ्यर्थी अपने प्राप्त अंकों के आधार को स्वयं जांच सके। उन्होंने कहा कि अंक और रैंक काउंसलिंग को सीधे प्रभावित करते हैं, इसलिए आपत्ति दर्ज करने के लिए स्पष्ट और सत्यापन योग्य व्यवस्था जरूरी है।

डीएमए के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि छात्रों की मांग किसी अतिरिक्त अंक या विशेष सुविधा की नहीं है। वे केवल परीक्षा परिणाम को लेकर स्पष्टता और पारदर्शिता चाहते हैं। संगठन ने अभ्यर्थियों से सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने और प्रवेश एवं काउंसलिंग की तैयारी जारी रखने की अपील की है।

डीएमए के अनुसार, यह मामला परीक्षा प्राधिकरण के साथ टकराव का विषय नहीं है। संगठन का उद्देश्य नीट-पीजी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के लिए विश्वसनीय, पारदर्शी और सत्यापन योग्य व्यवस्था सुनिश्चित करना है। मामले में आगे की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार होगी।

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