डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर NMC को कानूनी नोटिस, सनी देओल की फिल्म के कंटेंट पर भी जताई आपत्ति
www.healthbhaskar.com/रायपुर 03 नवम्बर 2026. देशभर में चिकित्सकों के साथ बढ़ती हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ और सचिव डॉ. राघव लैंगर को कानूनी नोटिस भेजा है। सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने आयोग पर डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है।
सोसायटी ने नोटिस में कहा है कि चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसके बावजूद NMC की ओर से केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त दिशा-निर्देश जारी करने तथा चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की गई है।
सनी देओल की फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट पर भी सवाल
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ के प्रमोशनल कंटेंट और दृश्यों पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का आरोप है कि फिल्म में पूरे मेडिकल सेक्टर को अनैतिक और भ्रष्ट दिखाने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा चिकित्सकों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां, गाली-गलौज और उन्हें गोली मारने जैसे हिंसक दृश्य भी दिखाए गए हैं।
सोसायटी का कहना है कि इस तरह की प्रस्तुति से आम लोगों के बीच डॉक्टरों के प्रति नकारात्मक धारणा और शत्रुता बढ़ सकती है। इससे चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को भी बढ़ावा मिलने की आशंका है।
NMC के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
सोसायटी ने NMC से मांग की है कि चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार रोकने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों को सख्त एडवायजरी जारी की जाए। फिल्म के कथित आपत्तिजनक दृश्यों और प्रचार सामग्री पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) तथा संबंधित न्यायिक मंचों पर हस्तक्षेप किया जाए।
इसके साथ ही नोटिस में NMC चेयरमैन और सचिव को अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने की नसीहत देते हुए कहा गया है कि यदि वे अपने पदों की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट जाएगी सोसायटी
डॉ. कुलदीप सोलंकी ने चेतावनी दी है कि यदि NMC की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने सहित अन्य कानूनी विकल्प अपनाएगी। संगठन ने आयोग के दोनों पदाधिकारियों से नोटिस पर अपना पक्ष रखने और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने की भी मांग की है।
