कार्डियक अरेस्ट के बाद 73 वर्षीय मरीज की जटिल हार्ट सर्जरी सफल, CABG और एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट एक साथ
www.healthbhaskar.com/रायपुर 06 अक्टूबर 2026. पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग ने एक और जटिल कार्डियक सर्जरी में सफलता हासिल की है। विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम ने 73 वर्षीय मरीज का सफलतापूर्वक कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) और एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट किया। मरीज को घर पर अचानक बेहोश होने के बाद कार्डियक अरेस्ट की गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था।
अस्पताल पहुंचने के समय मरीज की हृदय गति रुक चुकी थी। आपातकालीन विभाग की टीम ने तत्काल CPR, DC शॉक और डिफिब्रिलेशन की मदद से मरीज को पुनर्जीवित किया। इसके बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया।
EF सिर्फ 15 प्रतिशत, तीनों धमनियों में था ब्लॉकेज
जांच में मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता यानी Ejection Fraction (EF) करीब 15 प्रतिशत पाई गई। इसके अलावा उसकी तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज यानी Triple Vessel Disease था। मरीज के एओर्टिक वाल्व में भी गंभीर सिकुड़न (Severe Aortic Stenosis) पाई गई।
कार्डियक अरेस्ट के बाद मरीज को कई दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट और गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया। हालत में सुधार के बाद वेंटिलेटर हटाया गया, लेकिन ऑपरेशन से पहले करीब 23 दिनों तक कार्डियक सर्जरी ICU में मरीज की स्थिति को स्थिर किया गया। इस दौरान उसे एक्यूट किडनी इंजरी की समस्या भी हुई और कुछ समय के लिए पेशाब आना बंद हो गया था।
ऑपरेशन बेहद जोखिमपूर्ण, परिजनों को दी गई थी पूरी जानकारी
मरीज की उम्र, हालिया कार्डियक अरेस्ट, बेहद कम EF, तीनों कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज और गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस को देखते हुए सर्जरी को बेहद जोखिमपूर्ण माना गया। चिकित्सकों ने मरीज के परिजनों को ऑपरेशन की गंभीरता और संभावित जोखिमों की विस्तार से जानकारी दी। इसके बावजूद परिजनों ने सर्जरी के लिए सहमति दी।
एक ही सर्जरी में CABG और एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट
CTVS विभागाध्यक्ष एवं मुख्य सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि मरीज की बंद कोरोनरी धमनियों में वेन और आर्टरी कंड्यूट का उपयोग कर बाईपास ग्राफ्टिंग की गई। इसके बाद गंभीर रूप से संकुचित एओर्टिक वाल्व को हटाकर टाइटेनियम निर्मित बायलीफलेट मैकेनिकल एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपित किया गया।
उन्होंने बताया कि 73 वर्ष की उम्र, हालिया कार्डियक अरेस्ट, CPR के बाद केवल 15-20 प्रतिशत हृदय पंपिंग क्षमता, ट्रिपल वेसल डिजीज और गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस के कारण यह सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी। ऐसे मरीज में एक ही ऑपरेशन के दौरान CABG और एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट करना उच्च जोखिम वाली प्रक्रिया होती है।
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हुआ। वर्तमान में मरीज चिकित्सकीय रूप से स्थिर है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज करने की तैयारी की जा रही है। यह उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया।
डीन और अधीक्षक ने टीम को दी बधाई
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने जटिल सर्जरी की सफलता पर CTVS विभाग और पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर अस्पताल में गंभीर एवं जटिल हृदय रोगों के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और बहुविषयक टीम के माध्यम से उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
सर्जरी में शामिल टीम
हार्ट सर्जन: डॉ. कृष्णकांत साहू, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष
कार्डियक एनेस्थीसिया: डॉ. संकल्प दीवान
पर्फ्युजनिस्ट: अंकिता श्रीवास्तव, दिगेश्वर
पीजी स्टूडेंट: डॉ. पल्लवी यादव
ओटी नर्सिंग स्टाफ: राजेन्द्र साहू, नूतन, नरेंद्र, मुनेश, चोवा, दुष्यन्त, तेजश्री
एनेस्थीसिया टेक्नीशियन: भूपेंद्र, हरीश, निराकार, सरिता, खेमसिंह, रोजलिन
ICU नर्सिंग स्टाफ: तेजेन्द्र, भावना, शिबा, जागृति एवं अन्य स्टाफ
