प्रसव के बाद 25% रह गई थी दिल की पंपिंग क्षमता, मेकाहारा में महिला को मिला नया जीवन
www.healthbhaskar.com/रायपुर 27 अक्टूबर 2026. प्रसव के बाद गंभीर हृदय रोग से जूझ रही एक महिला को रायपुर के डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में नया जीवन मिला है। महिला की हृदय गति घटकर लगभग 40 प्रति मिनट रह गई थी, जबकि हृदय की रक्त पंप करने की क्षमता केवल 25 प्रतिशत बची थी। स्थिति गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने पहले आपातकालीन टेम्पररी पेसमेकर लगाया। इसके बाद मरीज की हालत स्थिर होने पर जानलेवा हृदय गति की समस्या से बचाव के लिए इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (ICD) डिवाइस का निःशुल्क प्रत्यारोपण किया गया।
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अम्बेडकर अस्पताल के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) के कार्डियोलॉजी विभाग में महिला का उपचार किया गया। मरीज पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी, कंप्लीट हार्ट ब्लॉक और वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया जैसी गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं से पीड़ित थी। उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर उपचार और आईसीडी डिवाइस प्रत्यारोपण की निःशुल्क व्यवस्था की गई।
प्रसव के बाद बिगड़ने लगी थी तबीयत
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, महिला का प्रसव कोरबा में सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ था। प्रसव के बाद उसे सांस फूलने की शिकायत होने लगी और हृदय की धड़कन असामान्य रूप से कम हो गई। जांच में कंप्लीट हार्ट ब्लॉक का पता चला। इसके साथ ही पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी के कारण हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो गई थीं और रक्त पंप करने की क्षमता घटकर 25 प्रतिशत रह गई थी।
महिला को वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया की समस्या भी हो रही थी। इस स्थिति में हृदय के निचले कक्षों से असामान्य रूप से तेज धड़कन उत्पन्न होती है। इसके कारण मरीज की धड़कन अनियंत्रित हो जाती थी और वह बेहोश हो जाती थी। चिकित्सकों के अनुसार, ऐसी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती थी।
पहले आपातकालीन पेसमेकर, फिर ICD का प्रत्यारोपण
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। हृदय गति लगभग 40 प्रति मिनट होने और कंप्लीट हार्ट ब्लॉक के कारण पहले टेम्पररी पेसमेकर लगाया गया। अनियंत्रित और जानलेवा तेज धड़कन को नियंत्रित करने के लिए मरीज को इलेक्ट्रिक शॉक भी दिया गया।
मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद भविष्य में खतरनाक हृदय गति की समस्या से बचाव के लिए इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (ICD) का प्रत्यारोपण किया गया। यह उपकरण हृदय की जानलेवा तेज धड़कन की पहचान कर जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रिक शॉक देकर उसे सामान्य करने में मदद करता है।
इस तरह मरीज के उपचार में दो अहम प्रक्रियाएं की गईं। पहली, आपातकालीन स्थिति में टेम्पररी पेसमेकर लगाना और दूसरी, स्थिति स्थिर होने के बाद ICD डिवाइस प्रत्यारोपित करना।
निजी अस्पताल में करीब साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च
मरीज की गंभीर हालत के साथ उसकी आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण थीं। इसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के संज्ञान में आने के बाद उनके निर्देश पर उपचार का खर्च उठाने और आईसीडी डिवाइस निःशुल्क लगाने की व्यवस्था की गई।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, निजी अस्पताल में इस तरह के उपचार पर लगभग साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव को मरीज के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने तथा उपचार की प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।
क्या है पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी?
पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी हृदय की एक गंभीर बीमारी है, जो गर्भावस्था के अंतिम चरण या प्रसव के आसपास विकसित हो सकती है। इसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे शरीर में रक्त पंप करने की क्षमता कम हो जाती है।
इसके प्रमुख लक्षणों में सांस फूलना, अत्यधिक थकान, पैरों में सूजन और हृदय गति में बदलाव शामिल हैं। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह हृदय विफलता जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
