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महज 900 ग्राम वजन के नवजात ने जीती जिंदगी की जंग, दो माह के उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी

www.healthbhaskar.com/रायपुर 17 अक्टूबर 2026. छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने अपनी मेहनत और समर्पण से महज 900 ग्राम वजन के नवजात शिशु को नया जीवन दिया है। समय से पहले जन्मे इस बच्चे को सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या थी। लगभग दो माह तक चले उपचार और विशेष देखभाल के बाद शिशु का वजन बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 8 अक्टूबर 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

900 ग्राम वजन, जन्म के बाद हालत थी गंभीर

गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी गोमती के नवजात का जन्म समय से पहले हुआ था। जन्म के समय उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। कम वजन के साथ सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया के कारण उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। बच्चे को विशेष निगरानी और तत्काल उपचार की जरूरत थी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने उपचार शुरू किया। शिशु के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी करते हुए उसकी जरूरतों के अनुसार चिकित्सा और पोषण संबंधी देखभाल की गई।

दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट, दो यूनिट रक्त चढ़ाया

उपचार के दौरान शिशु को सांस लेने में परेशानी के कारण लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। गंभीर एनीमिया को देखते हुए उसे दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। इसके साथ ही शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने, नियमित फीडिंग और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) सहित आवश्यक देखभाल की गई।

चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी तथा उपचार से शिशु की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। करीब दो माह की देखभाल के बाद उसका वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर उसे घर भेज दिया गया।

वनांचल के परिवार के लिए जिला अस्पताल बना सहारा

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में गंभीर अवस्था में पहुंचे नवजात का जिला स्तर पर सफल उपचार होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एसएनसीयू में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सकों की निगरानी और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की देखभाल से बच्चे को समय पर उपचार मिल सका। इससे परिवार को गंभीर स्थिति में बेहतर चिकित्सा के लिए अन्य शहरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हुई।

चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के प्रयासों से मिली सफलता

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन और सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम तथा एसएनसीयू के समस्त नर्सिंग स्टाफ ने उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने लगभग दो माह तक शिशु के स्वास्थ्य, पोषण और उपचार की निगरानी की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। जिला चिकित्सालय में नवजात को मिला सफल उपचार शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध विशेष देखभाल सुविधाओं के महत्व को दर्शाता है। गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहे बच्चे का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।

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