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स्वाइन फ्लू में पहले 48 घंटे अहम, लक्षण दिखते ही डॉक्टर से लें सलाह

www.healthbhaskar.com/रायपुर  24 सितम्बर 2026. मौसम में बदलाव के साथ H1N1 यानी स्वाइन फ्लू जैसे वायरल संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमण के शुरुआती दौर में सही पहचान और समय पर उपचार से बीमारी के गंभीर रूप लेने का जोखिम कम किया जा सकता है। MMI हॉस्पिटल रायपुर की डॉ. दीप्ति मास्के ने बताया कि फ्लू के लक्षण दिखाई देने के बाद शुरुआती 48 घंटे उपचार के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

क्या है H1N1 संक्रमण

स्वाइन फ्लू या H1N1 इन्फ्लुएंजा, इन्फ्लुएंजा-ए वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली बूंदों, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और दूषित सतहों को छूने के बाद चेहरे को छूने से फैल सकता है।

शुरुआती उपचार क्यों जरूरी

डॉ. मास्के के अनुसार फ्लू के शुरुआती चरण में वायरस तेजी से बढ़ सकता है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दी जाने वाली ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवाएं वायरस के प्रसार को सीमित करने में मदद कर सकती हैं। समय पर उपचार से गंभीर संक्रमण, सांस संबंधी परेशानी और अस्पताल में भर्ती होने जैसी जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।

बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के अलावा मधुमेह, हृदय, फेफड़े या किडनी संबंधी बीमारी तथा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में विशेष सावधानी जरूरी है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

स्वाइन फ्लू के दौरान सांस लेने में बढ़ती परेशानी, तेज या कठिन सांस, सीने में दर्द, होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना, भ्रम की स्थिति, अत्यधिक नींद आना, खाने-पीने में परेशानी या उल्टी जैसे लक्षण गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है।

खुद से दवा लेने से बचें

फ्लू को सामान्य वायरल बुखार समझकर इलाज में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों ने बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचने की सलाह दी है। लक्षण लगातार बने रहने या बिगड़ने पर डॉक्टर से जांच और उचित उपचार लेना जरूरी है।

संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी जरूरी

फ्लू से बचाव के लिए नियमित रूप से हाथ धोना, खांसते या छींकते समय नाक-मुंह ढकना, लक्षण होने पर मास्क पहनना और दूसरों से दूरी बनाए रखना उपयोगी उपाय हैं। विशेष रूप से बीमार होने पर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के संपर्क से बचने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने हर साल मौसमी इन्फ्लुएंजा का टीका लगवाने को भी संक्रमण और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने के उपायों में शामिल बताया है।

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