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दुर्लभ नसों की बनावट बनी चुनौती, अल्फा लूप तकनीक से सफल पेसमेकर प्रत्यारोपण

www.healthbhaskar.com/रायपुर 09 सितम्बर 2026. डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के उन्नत हृदय चिकित्सा संस्थान में 41 वर्षीय महिला के पूर्ण हृदय अवरोध का जटिल उपचार सफलतापूर्वक किया गया। मरीज की हृदय तक जाने वाली नसों की बनावट सामान्य से अलग होने के कारण स्थायी हृदय गति नियंत्रक यंत्र (पेसमेकर) की तार पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। चिकित्सकों ने अल्फा लूप तकनीक का उपयोग कर दो-कक्षीय पेसमेकर सफलतापूर्वक लगाया।

कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, मरीज को हृदय की धड़कन बहुत धीमी होने की स्थिति यानी मंदहृदयगति के साथ पूर्ण हृदय अवरोध था। जांच में परसिस्टेंट लेफ्ट सुपीरियर वेना कावा (पीएलएसवीसी) नामक जन्मजात शिरा संरचना सामने आई।

इसमें शरीर के ऊपरी हिस्से से हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली बाईं ओर की शिरा सामान्य रूप से समाप्त होने के बजाय बनी रहती है। अधिकांश लोगों में इससे कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन हृदय में पेसमेकर लगाने जैसी प्रक्रियाओं में यह अलग शिरापरक मार्ग चिकित्सकों के लिए चुनौती बन सकता है।

सामान्य स्थिति में पेसमेकर की तार ऊपरी महाशिरा से होते हुए दाएं आलिंद और फिर दाएं निलय तक पहुंचाई जाती है। इस मरीज में तार को बाईं ओर की शिरा से हृदय की शिरा-जालिका (कोरोनरी साइनस) के रास्ते दाएं आलिंद तक लाना पड़ा। इसके बाद त्रिकपर्दी कपाट को पार कर तार को दाएं निलय में स्थापित करना था।

इस चुनौती से निपटने के लिए चिकित्सकों ने अल्फा लूप तकनीक अपनाई। इसमें तार को दाएं आलिंद में विशेष घुमाव देकर यूनानी अक्षर ‘अल्फा’ जैसा घेरा बनाया जाता है। इससे तार को उचित दिशा और आवश्यक ढील के साथ दाएं निलय तक पहुंचाकर स्थिर किया जा सका।

इसके बाद दो-कक्षीय पेसमेकर का सफल प्रत्यारोपण किया गया। प्रक्रिया के बाद पेसमेकर की कार्यप्रणाली संतोषजनक रही और मरीज की स्थिति स्थिर है।

यह प्रक्रिया डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. इनायत रिजवी, डॉ. वासु कन्नौज और डॉ. मसूद की टीम ने पूरी की। तकनीकी सहयोग नवीन और जितेंद्र ने दिया, जबकि नर्सिंग स्टाफ बुद्धेश्वर, रोशनी और आशा ने मरीज की देखभाल की। उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। एसीआई में इस जटिल प्रक्रिया की सफलता को उन्नत हृदय उपचार सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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