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बच्चों को नई उम्मीद, 53 बच्चों की हृदय जांच, 18 का होगा निःशुल्क ऑपरेशन

www.healthbhaskar.com रायपुर/कबीरधाम 24/07/2026. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर कबीरधाम जिले में जन्मजात एवं अन्य हृदय रोगों से पीड़ित बच्चों के बेहतर उपचार के लिए विशेष निःशुल्क ईको कार्डियोग्राफी जांच शिविर आयोजित किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत जिला चिकित्सालय संबद्ध शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रायपुर के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के सहयोग से आयोजित इस शिविर में 53 बच्चों की विशेषज्ञ जांच की गई, जिनमें 18 बच्चों को हृदय ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया। इन सभी बच्चों का ऑपरेशन एवं उपचार शासन की ओर से पूरी तरह निःशुल्क कराया जाएगा।

समय पर पहचान से मिलेगा जीवनदान

शिविर का उद्देश्य जन्मजात और अन्य हृदय रोगों से पीड़ित बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें शीघ्र उपचार उपलब्ध कराना था। चिरायु योजना के तहत चिन्हित बच्चों को आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना निःशुल्क ऑपरेशन और विशेषज्ञ उपचार की सुविधा प्रदान की जाएगी, ताकि किसी भी बच्चे का इलाज धन के अभाव में प्रभावित न हो।

कलेक्टर ने किया निरीक्षण

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने शिविर का निरीक्षण कर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रकार के विशेष जांच शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएं और हृदय रोग से पीड़ित प्रत्येक बच्चे का उपचार बिना किसी विलंब के सुनिश्चित किया जाए।

विशेषज्ञों ने की ईको कार्डियोग्राफी जांच

शिविर में रायपुर से आए पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. चन्द्रकांत उसेंडी ने बच्चों की ईको कार्डियोग्राफी कर उनकी हृदय संबंधी समस्याओं का परीक्षण किया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

चिरायु योजना से मिल रही बड़ी राहत

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत स्कूलों, आश्रम-छात्रावासों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। गंभीर बीमारी की पहचान होने पर बच्चों को शासन द्वारा अनुबंधित शासकीय एवं निजी अस्पतालों में, आवश्यकता पड़ने पर राज्य के बाहर भी, निःशुल्क उपचार और ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

हृदय रोग के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि यदि बच्चे को दूध पीते समय जल्दी थकान, अत्यधिक पसीना आना, होंठ या नाखून नीले पड़ना, वजन नहीं बढ़ना, तेज सांस चलना, थोड़े परिश्रम में सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य न समझें। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।

यह शिविर न केवल बच्चों के समय पर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि गंभीर हृदय रोगों से जूझ रहे कई बच्चों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद भी लेकर आया।

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