विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस: डॉक्टरों की अपील—लक्षणों का इंतजार नहीं, समय रहते कराएं जांच
www.healthbhaskar.com/ रायपुर। 02/08/2026. फेफड़ों का कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में शामिल है और इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मामलों का पता बीमारी के उन्नत चरण में चलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में इस कैंसर के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए उच्च जोखिम वाले लोगों को लक्षणों का इंतजार करने के बजाय समय पर जांच करानी चाहिए।
विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस के अवसर पर एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर के विशेषज्ञों ने लोगों से जागरूक रहने और नियमित स्क्रीनिंग कराने की अपील की है। अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी डॉ. दीपेश मास्के ने कहा कि जब तक मरीज खांसी, सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षणों के साथ अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक कई मामलों में बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक धूम्रपान, सेकेंड हैंड स्मोक, कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों के संपर्क तथा पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक रहता है।
एसोसिएट कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी डॉ. आकांक्षा सरडा सक्सेना ने बताया कि 50 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोग, जिनका लंबे समय तक धूम्रपान का इतिहास रहा है, उन्हें हर वर्ष लो-डोज़ सीटी (LDCT) स्कैन कराना चाहिए। यह जांच कम रेडिएशन वाली, सुरक्षित और तेज प्रक्रिया है, जिससे लक्षण सामने आने से पहले ही कैंसर की शुरुआती पहचान संभव हो सकती है।
कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. देवरत हिशिकर ने कहा कि कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर उपचार अपेक्षाकृत आसान होता है और कई मामलों में केवल सर्जरी से ही मरीज स्वस्थ हो सकता है। वहीं, देर से पहचान होने पर कीमोथेरेपी, रेडिएशन और टारगेटेड थेरेपी जैसे जटिल उपचारों की आवश्यकता पड़ सकती है तथा उपचार के परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों से धूम्रपान से दूर रहने, तंबाकू का सेवन छोड़ने, जोखिम कारकों के प्रति जागरूक रहने और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। उनका कहना है कि समय पर जांच और शीघ्र पहचान ही फेफड़ों के कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है और इससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
