Sun. Aug 23rd, 2026

नेत्रदान को बढ़ावा देने राज्य स्तरीय कार्यशाला, 100 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण

www.healthbhaskar.com/रायपुर 23 अगस्त 2026. क्षेत्रीय नेत्र अनुसंधान संस्थान (RIO) एवं नेत्र रोग विभाग, पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर द्वारा “नेत्रदान प्रक्रियाओं पर नवीनतम जानकारी” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। टेलीमेडिसिन हॉल, डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के 32 जिलों से आए 100 से अधिक नेत्र सहायक अधिकारियों एवं सहायक नेत्रदान अधिकारियों ने प्रशिक्षण लिया।

स्वास्थ्य मंत्री की प्रेरणा से पहल

कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए किया गया। कुछ माह पूर्व चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने श्रीलंका में नेत्रदान की उच्च दर का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ में नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता बताई थी।

राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े 25 अगस्त से 8 सितंबर के पहले आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को नेत्रदान की प्रक्रिया के साथ-साथ संभावित दाताओं के परिवारों की प्रभावी काउंसलिंग के लिए तैयार करना रहा।

नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया का दिया गया प्रशिक्षण

कार्यशाला में शोकग्रस्त परिवारों से संवाद, काउंसलिंग, भ्रांतियों का समाधान, डोनर चयन एवं मेडिकल स्क्रीनिंग, कॉर्निया प्राप्त करने की तकनीक, ऊतक संरक्षण, कोल्ड चेन और सुरक्षित परिवहन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

प्रतिभागियों को कंसेंट फॉर्म, डेथ सर्टिफिकेट और आई बैंक रिकॉर्ड सहित आवश्यक दस्तावेजीकरण की जानकारी भी दी गई। वास्तविक मामलों पर चर्चा, इंटरैक्टिव क्विज और रोल-प्ले के माध्यम से कठिन परिस्थितियों में परिवारों से संवाद करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में हैंड्स-ऑन एवं डेमोंस्ट्रेशन आधारित प्रशिक्षण पर विशेष जोर रहा। एन्यूक्लिएशन की वीडियो डेमोंस्ट्रेशन, इन-सिटू कॉर्नियोस्क्लेरल रिम प्राप्त करने एवं संरक्षण, परिवहन, काउंसलिंग, डॉक्यूमेंटेशन और मॉइस्ट चैंबर तैयार करने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई।

डीन और अधीक्षक का रहा सहयोग

कार्यशाला के आयोजन में महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के मार्गदर्शन एवं सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने व्यवस्थागत सहयोग और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

संस्थान की ओर से कहा गया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि नेत्रदान से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों के ज्ञान, कौशल और संवेदनशीलता को मजबूत करना है।

नेत्रदान के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर

विशेषज्ञों ने कहा कि नेत्रदान को सफल बनाने में चिकित्सकों के साथ नेत्र सहायक अधिकारियों और सहायक नेत्रदान अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। संभावित दाता की पहचान से लेकर परिवार की काउंसलिंग, नेत्र प्राप्ति, संरक्षण और दस्तावेजीकरण तक स्वास्थ्यकर्मी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।

कार्यशाला का समापन पोस्ट-टेस्ट और प्रतिभागियों के फीडबैक के साथ हुआ। प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग अपने-अपने जिलों में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए करने का संदेश दिया गया।

“दृष्टि का उपहार, आशा की विरासत—जीवन को नया आयाम” संदेश के साथ आयोजित यह कार्यशाला प्रदेश में नेत्रदान की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

इन्हें भी पढ़े

You cannot copy content of this page