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धमनियों में छिपा खतरा: पैरों का दर्द, ठंडापन और न भरने वाले घाव को न करें नजरअंदाज

www.healthbhaskar.com/रायपुर 22 अगस्त 2026. पैरों में बार-बार दर्द या ऐंठन, पैर ठंडे रहना और लंबे समय तक घाव का न भरना अक्सर सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन ये लक्षण वैस्कुलर डिजीज यानी रक्त वाहिकाओं में रक्त संचार की समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। समय रहते पहचान और जांच से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के एडल्ट कार्डियक सर्जरी एवं पीडियाट्रिक एंड कॉन्जेनिटल हार्ट सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. हरि कुमार पी.के. के अनुसार, वैस्कुलर डिजीज ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त वाहिकाओं में रुकावट के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों, खासकर हाथ-पैरों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। इसके शुरुआती संकेत कई बार इतने सामान्य होते हैं कि मरीज उन्हें उम्र, मौसम या रोजमर्रा की थकान से जोड़ देता है।

छोटे लगने वाले लक्षण दे सकते हैं बड़े खतरे का संकेत

चलने पर पैरों में दर्द या ऐंठन, आराम करने पर दर्द कम होना, पैर या पंजे का असामान्य रूप से ठंडा रहना, त्वचा के रंग में बदलाव और घाव का लंबे समय तक न भरना ऐसे संकेत हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।

समय पर उपचार नहीं मिलने पर रक्त संचार की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। कुछ मामलों में प्रभावित अंग तक रक्त की आपूर्ति बेहद कम हो सकती है, जिससे गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

डायबिटीज और धूम्रपान करने वालों में ज्यादा खतरा

डायबिटीज और धूम्रपान वैस्कुलर डिजीज के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। डायबिटीज से पीड़ित लोगों में पैरों के घावों के ठीक होने में परेशानी और रक्त संचार संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease) का जोखिम बढ़ाता है।

कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब पैर का घाव भरना बंद हो जाता है या किसी अंग में रक्त का प्रवाह बेहद कम हो जाता है। ऐसी स्थिति को आपातकालीन चिकित्सा की जरूरत हो सकती है।

समय पर जांच से टल सकता है बड़ा खतरा

वैस्कुलर डिजीज की शुरुआती पहचान के लिए चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और जोखिम कारकों के आधार पर रक्तचाप, पैरों में रक्त प्रवाह तथा आवश्यकतानुसार अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं।

शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर जीवनशैली में बदलाव, धूम्रपान छोड़ना, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाओं से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। गंभीर मामलों में अन्य उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

डर नहीं, समय पर सतर्कता जरूरी

वैस्कुलर डिजीज को लेकर डरने के बजाय इसके संकेतों को पहचानना और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। खासकर डायबिटीज से पीड़ित लोगों, धूम्रपान करने वालों और अन्य जोखिम वाले व्यक्तियों को पैरों में लगातार दर्द, ठंडापन, त्वचा के रंग में बदलाव या न भरने वाले घाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

समय पर जांच और उपचार कई गंभीर जटिलताओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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