चिरायु योजना से बदली बस्तर की परिक्रमा की जिंदगी, कॉकलियर इम्प्लांट से लौटी सुनने की क्षमता
www.healthbhaskar.com/रायपुर 27 सितम्बर 2026. बस्तर जिले की पांच वर्षीय परिक्रमा साहू के जीवन में चिरायु योजना के तहत मिले उपचार से बड़ा बदलाव आया है। जन्म से सुनने और बोलने की क्षमता से वंचित परिक्रमा अब आवाजें सुन और पहचान पा रही है। उपचार के बाद उसने सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जाना भी शुरू कर दिया है।
जगदलपुर के अघनपुर निवासी अनूप साहू की बेटी परिक्रमा जब करीब तीन वर्ष की थी, तब चिरायु टीम नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची थी। टीम ने बच्ची को एक कोने में शांत बैठे देखा। बातचीत करने पर उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जानकारी लेने पर पता चला कि बच्ची जन्म से ही सुन और बोल नहीं सकती थी।
इसके बाद चिरायु टीम ने बच्ची के माता-पिता से संपर्क किया और उन्हें उपचार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। परिजनों की सहमति के बाद परिक्रमा को महारानी जिला अस्पताल जगदलपुर स्थित जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई लाया गया, जहां उसकी आवश्यक बेरा जांच कराई गई। विशेषज्ञ उपचार के लिए उसे एम्स रायपुर रेफर किया गया।
एम्स के चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी की सलाह दी। सर्जरी से पहले करीब एक वर्ष तक आवश्यक ऑडियो थेरेपी जिला शीघ्र हस्तक्षेप इकाई जगदलपुर के माध्यम से कराई गई। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 अप्रैल 2024 को एम्स रायपुर में परिक्रमा का सफल कॉकलियर इम्प्लांट ऑपरेशन किया गया।
सर्जरी के बाद परिक्रमा धीरे-धीरे आवाजों को सुनने और पहचानने में सक्षम हुई। वर्तमान में उसे नियमित स्पीच थेरेपी भी दी जा रही है। उपचार के बाद परिक्रमा सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही है और स्कूल जाना शुरू कर चुकी है।
परिक्रमा की कहानी यह बताती है कि समय पर स्वास्थ्य जांच, समस्या की पहचान और विशेषज्ञ उपचार मिलने से जन्मजात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
