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डायबिटीज के मरीजों में बढ़ सकता है फ्रोजन शोल्डर का खतरा, कंधे की जकड़न को न करें नजरअंदाज

कंधे में दर्द, जकड़न या हाथ को ऊपर उठाने में परेशानी को अक्सर लोग उम्र बढ़ने, कैल्शियम की कमी या हड्डियों की कमजोरी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन अगर कंधे की मूवमेंट धीरे-धीरे कम हो रही है और बाल बनाने, कपड़े पहनने या हाथ को सिर के ऊपर ले जाने जैसे सामान्य काम मुश्किल होने लगे हैं, तो यह फ्रोजन शोल्डर (Adhesive Capsulitis) का संकेत हो सकता है। खासतौर पर डायबिटीज से जूझ रहे लोगों में इस समस्या का जोखिम बढ़ सकता है।

क्या है फ्रोजन शोल्डर?

फ्रोजन शोल्डर को मेडिकल भाषा में Adhesive Capsulitis कहा जाता है। इसमें कंधे के जोड़ के आसपास मौजूद कैप्सूल में सूजन और धीरे-धीरे टिशू के सख्त होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके कारण कंधे की सामान्य मूवमेंट सीमित होने लगती है और दर्द के साथ जकड़न महसूस हो सकती है।

शुरुआती दौर में दर्द प्रमुख समस्या हो सकता है, जबकि समय के साथ कंधे की अकड़न बढ़ने लगती है। मरीज को हाथ ऊपर उठाने, पीछे ले जाने, कपड़े पहनने या बाल बनाने में परेशानी होने लगती है।

डायबिटीज से क्यों बढ़ता है खतरा?

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित शोध के अनुसार डायबिटीज को फ्रोजन शोल्डर के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल किया गया है। 2016 के एक अध्ययन में डायबिटीज वाले लोगों में फ्रोजन शोल्डर का अनुमानित प्रसार करीब 13.4 प्रतिशत पाया गया था। अध्ययन में यह भी बताया गया कि डायबिटीज वाले लोगों में यह समस्या बिना डायबिटीज वाले लोगों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक देखी गई।

लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से शरीर के विभिन्न टिशू प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर कंधे के आसपास मौजूद कनेक्टिव टिशू और जॉइंट कैप्सूल पर भी पड़ सकता है। क्रोनिक हाइपरग्लाइसीमिया में कोलेजन में होने वाले बदलाव टिशू के लचीलेपन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे कंधे में अकड़न और फाइब्रोसिस की प्रक्रिया बढ़ सकती है।

हाई ब्लड शुगर से हड्डी नहीं, सॉफ्ट टिशू हो सकते हैं प्रभावित

फ्रोजन शोल्डर को केवल हड्डियों की कमजोरी से जोड़ना सही नहीं है। इस स्थिति में मुख्य भूमिका कंधे के सॉफ्ट टिशू, कनेक्टिव टिशू और जॉइंट कैप्सूल में होने वाले बदलावों की मानी जाती है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड ग्लूकोज कोलेजन की संरचना और टिशू की लोच को प्रभावित कर सकता है।

कुछ शोधों में अधिक HbA1c स्तर और फ्रोजन शोल्डर के बीच संबंध भी पाया गया है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि HbA1c बढ़ने पर हर डायबिटीज मरीज को फ्रोजन शोल्डर होगा।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

फ्रोजन शोल्डर के लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं—

  • कंधे में लगातार या बार-बार दर्द
  • हाथ ऊपर उठाने में परेशानी
  • हाथ को पीछे ले जाने में कठिनाई
  • कपड़े पहनने में दर्द या परेशानी
  • बाल बनाने या हाथ सिर के ऊपर ले जाने में दिक्कत
  • रात में कंधे का दर्द बढ़ना
  • कंधे की मूवमेंट धीरे-धीरे कम होना
  • कंधे में लगातार जकड़न महसूस होना

कैसे होता है इलाज?

फ्रोजन शोल्डर का इलाज समस्या की गंभीरता और मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। शुरुआती मामलों में दर्द नियंत्रित करने वाली दवाओं के साथ फिजियोथेरेपी और नियमित एक्सरसाइज की सलाह दी जा सकती है। अधिक गंभीर मामलों में विशेषज्ञ की निगरानी में गहन फिजियोथेरेपी कराई जाती है।

कुछ मरीजों में जरूरत के अनुसार जॉइंट में इंजेक्शन या हाइड्रोडाइलेशन जैसी प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है। गंभीर और लंबे समय से बनी समस्या में विशेषज्ञ अन्य प्रक्रियाओं की सलाह भी दे सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर कंधे की मूवमेंट लगातार कम हो रही है, रात में दर्द बढ़ रहा है या हाथ को ऊपर और पीछे ले जाने में परेशानी होने लगी है, तो इसे केवल उम्र या कैल्शियम की कमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर डायबिटीज वाले लोगों में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर ऑर्थोपेडिक या फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ से जांच कराना उचित है। समय पर पहचान और उपचार से कंधे की गतिशीलता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

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