वायरल फीवर समझकर नजरअंदाज न करें मेनिन्जाइटिस के लक्षण, बैक्टीरियल संक्रमण में कुछ घंटों की देरी पड़ सकती है भारी
मेनिन्जाइटिस ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसे शुरुआती दौर में सामान्य वायरल फीवर समझना खतरनाक हो सकता है। इस बीमारी में मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड को ढकने वाली झिल्लियों में सूजन आ जाती है। मेनिन्जाइटिस वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या अन्य सूक्ष्मजीवों के कारण हो सकता है। इनमें बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस सबसे गंभीर रूपों में से एक है और तेजी से जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज में गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं, सुनने की क्षमता में कमी, दौरे, कोमा और मृत्यु तक का खतरा हो सकता है। यही वजह है कि इसके लक्षणों को पहचानना और तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना बेहद जरूरी है।
शुरुआत में वायरल फीवर जैसे दिखते हैं लक्षण
मेनिन्जाइटिस की शुरुआती अवस्था में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और ठंड लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग इसे सामान्य मौसमी वायरल संक्रमण समझकर घर पर ही दवा लेते रहते हैं।
हालांकि, यदि बुखार और सिरदर्द के साथ गर्दन में अकड़न, तेज सिरदर्द या रोशनी देखने में परेशानी होने लगे, तो इसे सामान्य बुखार मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन चेतावनी संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
मेनिन्जाइटिस के गंभीर लक्षणों में शामिल हैं—
- गर्दन का अकड़ जाना
- तेज सिरदर्द
- तेज बुखार
- रोशनी से परेशानी
- बार-बार उल्टी
- भ्रम या बेहोशी
- दौरे पड़ना
- त्वचा पर लाल या बैंगनी चकत्ते
विशेष रूप से मेनिंगोकोकल संक्रमण में त्वचा पर लाल या बैंगनी चकत्ते गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
वायरल और बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस में अंतर
मेनिन्जाइटिस का कारण अलग-अलग होने के कारण इसकी गंभीरता और उपचार भी अलग हो सकता है। वायरल मेनिन्जाइटिस कई मामलों में अपेक्षाकृत हल्का हो सकता है, जबकि बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस तेजी से गंभीर रूप ले सकता है और तत्काल चिकित्सकीय उपचार की जरूरत होती है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी का कारण तय करने के बजाय डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जांच जरूरी है।
किन लोगों में ज्यादा रहता है खतरा?
कुछ लोगों में मेनिन्जाइटिस का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। इनमें—
- 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
- नवजात शिशु
- किशोर और युवा
- 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति
- कैंसर या एचआईवी से प्रभावित लोग
- हॉस्टल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने वाले लोग
- जिनका मेनिन्जाइटिस से संबंधित टीकाकरण पूरा नहीं हुआ है
टीकाकरण और स्वच्छता से कम किया जा सकता है जोखिम
मेनिन्जाइटिस से हर मामले में पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए समय पर जरूरी टीकाकरण कराना, हाथों की स्वच्छता बनाए रखना, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना और संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीबी संपर्क से बचना महत्वपूर्ण है।
लक्षण दिखें तो तुरंत लें चिकित्सा सलाह
मेनिन्जाइटिस में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। तेज बुखार के साथ लगातार सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, रोशनी से परेशानी, भ्रम, दौरे या त्वचा पर असामान्य चकत्ते दिखाई दें तो इसे सामान्य वायरल फीवर समझकर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। खासकर बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस में स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। ऐसे लक्षण होने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल या चिकित्सक से संपर्क करना सबसे सुरक्षित कदम है।
