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100 से अधिक चिकित्सकों को मिला आधुनिक वैजाइनल सर्जरी का प्रशिक्षण

www.healthbhaskar.com रायपुर 13 जुलाई 2026. पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा यूरोगायनेकोलॉजी एवं वैजाइनल सर्जरी विषय पर दो दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) एवं लाइव सर्जिकल कार्यशाला का आयोजन किया गया।

वेजाइनल सर्जन सोसाइटी एवं मेनोपॉज सोसायटी के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश और देश के वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने पीजी विद्यार्थियों तथा चिकित्सकों को आधुनिक शल्य तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में 100 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया।

कार्यशाला का आयोजन जेएनएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी और डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के मार्गदर्शन में हुआ। विशेषज्ञों ने यूरोगायनेकोलॉजी से जुड़ी नवीनतम उपचार पद्धतियों, तकनीकों और महिला स्वास्थ्य से संबंधित जटिल समस्याओं पर व्याख्यान दिए।

आधुनिक तकनीकों पर हुआ व्यावहारिक प्रशिक्षण

दो दिवसीय लाइव सर्जिकल वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञों ने नॉन-डिसेंट वैजाइनल हिस्टरेक्टॉमी, सिस्टोसील रिपेयर, सैक्रो हिस्टेरोपेक्सी फिक्सेशन, वैजिनोस्कोपी, सिस्ट सर्जरी, प्रोलैप्स रिपेयर और हिस्टेरोस्कोपी सहित कई जटिल शल्य प्रक्रियाओं का लाइव प्रदर्शन किया। पीजी विद्यार्थियों और चिकित्सकों को इन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

कार्यशाला के पहले दिन यूरोडायनामिक स्टडी, मिक्स्ड एवं स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस तथा वॉल्ट प्रोलैप्स के वैजाइनल उपचार जैसे विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

महिलाओं को समय पर उपचार कराने की सलाह

प्रदेश की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आभा सिंह ने बताया कि प्राकृतिक वैजाइनल मार्ग से गर्भाशय निकालने की सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है। इसमें पेट पर चीरा नहीं लगता, दर्द अपेक्षाकृत कम होता है और मरीज कम समय में स्वस्थ होकर घर लौट सकती है।

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष तथा आयोजन की अध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल ने कहा कि कई महिलाएं संकोच या जागरूकता के अभाव में यूरिन लीक (मूत्र असंयम) और यूटेराइन प्रोलैप्स जैसी समस्याओं के लिए समय पर चिकित्सकीय सलाह नहीं लेतीं, जबकि आधुनिक चिकित्सा में इनका प्रभावी उपचार उपलब्ध है।

कार्यक्रम में डॉ. हरा पटनायक, डॉ. विनीत मिश्रा, डॉ. आशा जैन सहित कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इस कार्यशाला को 6 आईएमएस क्रेडिट पॉइंट्स भी प्रदान किए गए। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. शालिनी जैन, डॉ. रुचि किशोर गुप्ता, डॉ. जया लालवानी और डॉ. मंजु टंडन सहित अन्य चिकित्सकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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