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सुप्रीम कोर्ट में उठी वैक्सीन साइड इफेक्ट्स की गूंज, केंद्र से जवाब तलब

Healthbhaskar.com: रायपुर, 11 मार्च 2026| देश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान के दौरान सामने आए कथित गंभीर दुष्प्रभावों के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट नीति बनाने पर जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि यदि किसी व्यक्ति को कोविड-रोधी टीके के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्या या मृत्यु होती है, तो पीड़ितों के लिए मुआवजा देने की क्या व्यवस्था है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोविड-19 वैक्सीन के कुछ मामलों में गंभीर दुष्प्रभाव सामने आए हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता या मुआवजा देने के लिए सरकार के पास कोई स्पष्ट नीति नहीं है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर एक पारदर्शी और न्यायसंगत नीति तैयार करनी चाहिए ताकि प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल सके।

सरकार को नीति बनाने पर विचार करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान देशभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था। इस दौरान करोड़ों लोगों ने टीके की खुराक ली। यदि कुछ मामलों में गंभीर दुष्प्रभाव सामने आते हैं, तो उनके लिए मुआवजा और सहायता से जुड़ी स्पष्ट नीति होना जरूरी है। अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए कोई अलग तंत्र मौजूद है और यदि है तो उसके तहत कितने मामलों की जांच की गई है।

टीकाकरण अभियान और दुष्प्रभावों की जांच

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करोड़ों नागरिकों को कोविड-रोधी टीके की खुराक दी गई। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में टीके सुरक्षित पाए गए हैं, लेकिन दुर्लभ मामलों में दुष्प्रभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कई मामलों में वैक्सीन लेने के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुईं, जिनकी निष्पक्ष जांच और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की जा रही है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अदालत ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि यदि टीकाकरण के बाद गंभीर प्रतिकूल घटनाएं होती हैं तो उनकी जांच और पीड़ितों को राहत देने की क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में स्पष्ट नीति बनाती है तो इससे आम जनता का भरोसा भी मजबूत होगा और भविष्य में स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार हो सकेगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अदालत के निर्देश के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

 


 

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