8 साल से पहले पीरियड्स शुरू होना हो सकता है प्रीकोशियस प्यूबर्टी का संकेत, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
आमतौर पर लड़कियों में 11 से 13 साल की उम्र के बीच पीरियड्स शुरू होना सामान्य माना जाता है, लेकिन अब कुछ बच्चियों में 8 या 9 साल की उम्र से पहले ही पीरियड्स शुरू होने के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, कम उम्र में पीरियड्स आना हमेशा सामान्य बदलाव नहीं होता। यह प्रीकोशियस प्यूबर्टी यानी समय से पहले युवावस्था शुरू होने का संकेत भी हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
क्यों जल्दी शुरू हो रही है प्यूबर्टी?
विशेषज्ञों के अनुसार, लड़कियों में कम उम्र में प्यूबर्टी शुरू होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें बचपन में बढ़ता मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी, लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत, पर्याप्त नींद नहीं लेना, जंक और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन तथा आनुवंशिक कारण शामिल हैं। हालांकि हर मामले में किसी बीमारी को इसका कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन कम उम्र में प्यूबर्टी के लक्षण दिखने पर जांच जरूरी है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर 8 साल की उम्र से पहले बच्ची में ब्रेस्ट का विकास शुरू हो जाए, लंबाई तेजी से बढ़ने लगे, शरीर की गंध में बदलाव आए, चेहरे पर मुंहासे निकलने लगें या अंडरआर्म और प्राइवेट पार्ट में बाल आने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा मूड या व्यवहार में बदलाव और सामान्य उम्र से पहले पीरियड्स शुरू होना भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं।
कम उम्र में पीरियड्स आने से क्या खतरे?
बहुत कम उम्र में प्यूबर्टी शुरू होने से आगे चलकर मोटापा, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इससे मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। समय से पहले हार्मोनल बदलाव के कारण हड्डियों और लंबाई के विकास पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
स्वस्थ आदतें अपनाना जरूरी
विशेषज्ञ बच्चों का वजन संतुलित रखने, पौष्टिक और संतुलित आहार देने, रोजाना शारीरिक गतिविधि और आउटडोर खेलों के लिए समय निकालने तथा पर्याप्त नींद सुनिश्चित करने की सलाह देते हैं। जंक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी सीमित करना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि 8 साल की उम्र से पहले प्यूबर्टी के लक्षण दिखाई दें या बहुत कम उम्र में पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो पीडियाट्रिक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट या स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच, हार्मोन टेस्ट और बोन-एज टेस्ट जैसी जांच करा सकते हैं। कुछ मामलों में चिकित्सकीय उपचार के जरिए समय से पहले शुरू हुई प्यूबर्टी को अस्थायी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में पीरियड्स को केवल “जल्दी बड़े होने” का संकेत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से बच्ची के शारीरिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
