बिना गांठ और लक्षण के भी हो सकता है कैंसर, समय पर जांच जरूरी : डॉ. आकांक्षा चिखलीकर
रायपुर। कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में गांठ, दर्द या अन्य स्पष्ट लक्षणों की तस्वीर उभरती है। लेकिन कई मामलों में कैंसर शरीर में बिना किसी खास लक्षण के भी चुपचाप विकसित हो सकता है। जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं, तब तक बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में कैंसर की समय पर जांच और स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, रायपुर की ब्रेस्ट एवं सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा चिखलीकर का कहना है कि कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के लिए लोगों को लक्षणों का इंतजार नहीं करना चाहिए। वे कहती हैं, “जांच ही जीत है।” स्क्रीनिंग का उद्देश्य कैंसर या उसके पूर्व-चरण को शुरुआती और इलाज योग्य अवस्था में पहचानना है।
बिना गांठ के भी हो सकता है स्तन कैंसर
डॉ. चिखलीकर के अनुसार, स्तन कैंसर इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। कई बार स्तन में स्पष्ट गांठ महसूस हुए बिना भी कैंसर मौजूद हो सकता है। यही वजह है कि केवल स्वयं जांच में गांठ महसूस न होने को कैंसर की अनुपस्थिति नहीं माना जा सकता।
40 वर्ष की आयु के बाद, डॉक्टर की सलाह के अनुसार क्लिनिकल ब्रेस्ट जांच और मैमोग्राफी जैसी स्क्रीनिंग से स्तन कैंसर को शुरुआती और उपचार योग्य अवस्था में पहचानने में मदद मिल सकती है।
स्क्रीनिंग से पहले ही मिल सकती है चेतावनी
गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर के मामले में स्क्रीनिंग ऐसी असामान्य कोशिकीय स्थितियों का पता लगाने में मदद कर सकती है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती हैं। इसी तरह कोलन कैंसर में स्क्रीनिंग के दौरान पॉलिप का पता लगाया जा सकता है। कैंसर बनने से कई वर्ष पहले पॉलिप को निकाल देना बीमारी को आगे बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हर व्यक्ति के लिए एक जैसी स्क्रीनिंग नहीं
डॉ. चिखलीकर बताती हैं कि कैंसर स्क्रीनिंग सभी लोगों के लिए एक जैसी नहीं होती। स्क्रीनिंग का तरीका उम्र, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम कारकों के आधार पर तय किया जाता है।
यदि किसी व्यक्ति के करीबी परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, तो उसके कैंसर के जोखिम में वृद्धि हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर सामान्य आबादी की तुलना में कम उम्र में स्क्रीनिंग शुरू करने या अधिक बार जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
सामान्य रिपोर्ट का मतलब 100 प्रतिशत सुरक्षा नहीं
डॉक्टर के अनुसार, कोई भी स्क्रीनिंग टेस्ट 100 प्रतिशत सटीक नहीं होता। असामान्य रिपोर्ट आने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से कैंसर है। वहीं, सामान्य रिपोर्ट आने का अर्थ यह भी नहीं है कि भविष्य में कैंसर होने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।
इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति अपने लिए निर्धारित स्क्रीनिंग कार्यक्रम से जुड़ा रहे और किसी भी तरह की शंका होने पर चिकित्सक से परामर्श ले।
लक्षणों का इंतजार न करें
एक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टिक सर्जन के रूप में डॉ. आकांक्षा चिखलीकर लोगों को सलाह देती हैं कि कैंसर के लक्षण सामने आने का इंतजार करने के बजाय अपनी उम्र और जोखिम कारकों के अनुसार उचित स्क्रीनिंग करवाएं।
समय पर पहचान कैंसर के इलाज को आसान बनाने और जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉ. आकांक्षा चिखलीकर का संदेश है— “जांच ही जीत है। समय पर पहचान, बचा सकती है जान।”
