सिम्स में इन्फर्टिलिटी, आईवीएफ और एआरटी पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक उपचार के अनुभव
www.healthbhaskar.com/ बिलासपुर 02/08/2026. छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) एवं चिकित्सालय, बिलासपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा GENOVIA–ISAR के अंतर्गत इन्फर्टिलिटी, आईवीएफ (IVF) एवं असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं मेडिकल छात्रों को प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम वैज्ञानिक विकास, आधुनिक उपचार पद्धतियों और तकनीकी प्रगति से अवगत कराना था।
कार्यक्रम में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमण जोगी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला का सफल समन्वय डॉ. वेरोनिका ने किया।
कार्यशाला में सिम्स की ओर से डॉ. दीपिका सिंह, डॉ. रचना जैन, डॉ. सोमा वेंकट, डॉ. सौम्या दर्शन, डॉ. प्रतिभा सिंह एवं डॉ. प्राची तिवारी ने इन्फर्टिलिटी, आईवीएफ और एआरटी से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर विस्तृत व्याख्यान दिए। वहीं बिलासपुर की डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. संगीता शर्मा, डॉ. गीतिका शर्मा एवं डॉ. इंदुबाला मिंज ने आधुनिक प्रजनन चिकित्सा के व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
रायपुर से रायपुर मेडिकल कॉलेज की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल, डॉ. वेरोनिका एवं डॉ. मोनिका ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में आधुनिक आईवीएफ, एआरटी, जटिल इन्फर्टिलिटी मामलों के प्रबंधन तथा नवीनतम उपचार तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यशाला में सिम्स के पीजी रेजिडेंट्स, एमबीबीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के अलावा अपोलो हॉस्पिटल और रेलवे हॉस्पिटल के डीएनबी विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर आधुनिक प्रजनन चिकित्सा से जुड़ी नई जानकारियां प्राप्त कीं।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमण जोगी ने कहा कि वर्तमान समय में इन्फर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी के माध्यम से अधिकांश दंपत्तियों का सफल उपचार संभव है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को अद्यतन रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिम्स में नियमित रूप से वैज्ञानिक कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि चिकित्सकों को चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण मिल सके और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सतत शैक्षणिक गतिविधियां अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के सहयोग से ऐसे कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन कर प्रदेश की जनता को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञ वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी इस प्रकार की वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के नियमित आयोजन का संकल्प लिया गया।
