रेजिडेंट डॉक्टरों के हक में डीएमए की आवाज, 24-36 घंटे की ड्यूटी खत्म करने की मांग
healthbhaskar.com नई दिल्ली, 13 जून 2026 । डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) ने देशभर के रेजिडेंट डॉक्टर्स के अधिकारों, मानवीय कार्य परिस्थितियों एवं मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से उठाते हुए स्पष्ट किया है कि हरियाणा सहित देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टर्स को पूर्ववत वार्षिक, साप्ताहिक एवं आकस्मिक अवकाश निरंतर दिए जाने चाहिए।
पंडित बी.डी. शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़,रोहतक द्वारा 5 फ़रवरी,2025 को जारी किए गए आदेश के अनुसार अब रेज़िडेंट डॉक्टरों (MD/MS/MDS) को वर्ष में 52 में से केवल 10 रविवारों पर कार्य करना होगा तथा इसके बदले उन्हें 10 अतिरिक्त अवकाश प्रदान किए जाएंगे, जिन्हें वे एक साथ लेकर अपने परिवार के साथ समय व्यतीत कर सकेंगे।साथ ही NMC दिशा-निर्देशों के अनुरूप 20 आकस्मिक अवकाश देने का भी प्रावधान किया गया है।
इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए लगातार संवाद, प्रतिनिधिमंडल बैठकों एवं डॉक्टरों की समस्याओं को मजबूती से उठाने का कार्य डॉ. अमित व्यास, डॉ शुभ प्रताप सोलंकी, भानु कुमार एवं समस्त डीएमए टीम द्वारा किया गया था। इस दौरान हरियाणा बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बडोली, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, विधायक सावित्री देवी जिंदल, यूनिवर्सिटी कुलपति एवं डीन ऐकडेमिक अफेयर्स से कई स्तरों पर चर्चा कर रेज़िडेंट डॉक्टरों के हितों को प्रमुखता से रखा गया।
डीएमए इंडिया ने इस दौरान सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम,1992 का उल्लेख करते हुए कहा कि:
-सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नियमित कार्य लेना
-एक बार में 12 घंटे से अधिक लगातार ड्यूटी करवाना मानवीय कार्य परिस्थितियों एवं निर्धारित नियमों के प्रतिकूल है।
इसके बावजूद देश के अनेक मेडिकल कॉलेजों में आज भी रेजिडेंट डॉक्टर्स से 24 घंटे, 30 घंटे, यहाँ तक कि 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करवाई जा रही है।
डीएमए ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 42 मानवीय कार्य परिस्थितियों एवं उचित कार्य समय सुनिश्चित करने की बात करता है। यदि किसी रेजिडेंट डॉक्टर को अमानवीय ड्यूटी घंटे, लगातार कार्य, नींद एवं भोजन से वंचित रखने, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान अथवा अवैध कार्य परिस्थितियों में मजबूर किया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
डीएमए इंडिया द्वारा उल्लेखित प्रमुख BNS धाराएँ:
1.) मानवीय कार्य परिस्थितियों (Article 42) के उल्लंघन की स्थिति में — Section 74 BNS एवं Section 75 BNS
2.) नींद एवं भोजन से वंचित रखने एवं लगातार शारीरिक-मानसिक थकावट जैसी परिस्थितियों में — Section 120 BNS एवं Section 125 BNS के अंतर्गत मामला बन सकता है।
3.) 24–36 घंटे लगातार अमानवीय ड्यूटी करवाने की स्थिति में — Section 125 BNS एवं Section 146 BNS के तहत सुरक्षा,स्वास्थ्य एवं मानवीय गरिमा से समझौता माना जा सकता है।
4.) सार्वजनिक अपमान, मानसिक उत्पीड़न एवं कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार की स्थिति में — Section 351 BNS, Section 352 BNS के अंतर्गत प्रावधान लागू हो सकते हैं।
डीएमए इंडिया ने मांग की है कि:
-देश के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में रोहतक मॉडल की तर्ज पर अवकाश नीति लागू की जाए।
-सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम ,1992 को सख्ती से लागू किया जाए।
-रेजिडेंट डॉक्टर्स की ड्यूटी अवधि वैज्ञानिक एवं मानवीय आधार पर निर्धारित की जाए।
-24–36 घंटे की लगातार ड्यूटी प्रथा तत्काल समाप्त की जाए
-रेजिडेंट डॉक्टर्स के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
डीएमए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ व्यास के अनुसार,किसी भी मेडिकल कॉलेज, विभाग या प्रशासन द्वारा अवकाश रोकना अथवा मनमाने तरीके से समाप्त करना पूर्णतः अस्वीकार्य है।यदि किसी संस्थान अथवा विभाग द्वारा रेजिडेंट डॉक्टर्स को नियमानुसार अवकाश देने से इंकार किया जाता है, तो डीएमए उसके विरुद्ध संगठनात्मक, प्रशासनिक एवं कानूनी स्तर पर कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।
