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कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले FMGs पर नया नियम, डीएमए इंडिया का कड़ा विरोध

Healthbhaskar.com: नई दिल्ली , 13 मार्च 2026| विदेशी चिकित्सा स्नातकों ,फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन FMGS से जुड़े नए नियम को लेकर देशभर में चिकित्सा समुदाय में असंतोष बढ़ता जा रहा है। डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ,डीएमए इंडिया ने एनएमसी द्वारा जारी नोटिस का कड़ा विरोध करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। डीएमए इंडिया का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले विदेशी चिकित्सा स्नातकों पर अनिवार्य ऑन-साइट कम्पेन्सेशन लागू करने का निर्णय अन्यायपूर्ण है और इससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

एनएमसी के नोटिस पर उठा विवाद

एनएमसी द्वारा जारी नोटिस नंबर U-15024/15/2024-UGMEB(Pt) में यह कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले विदेशी चिकित्सा स्नातकों को भारत में पंजीकरण के लिए अतिरिक्त ऑन-साइट प्रशिक्षण या कम्पेन्सेशन पूरा करना होगा।

डीएमए इंडिया संगठन के अनुसार यह नियम उन छात्रों पर पिछली तारीख से लागू किया जा रहा है, जिन्होंने महामारी के दौरान परिस्थितियों के कारण ऑनलाइन पढ़ाई की थी। संगठन का कहना है कि यह निर्णय न केवल अनुचित है बल्कि छात्रों के अधिकारों के खिलाफ भी है।

 

                                    डॉ. अमित व्यास,राष्ट्रीय अध्यक्ष डीएमए इंडिया

डीएमए इंडिया ने जताई कड़ी आपत्ति

डीएमए इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित व्यास, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भानु कुमार, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. शुभ प्रताप सोलंकी, राज्य प्रवक्ता डॉ. सिंह कृतिका जनार्दन और राष्ट्रीय एफएमजी सचिव डॉ. सौरभ यादव ने संयुक्त रूप से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर इस नोटिस को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

डॉ. अमित व्यास ने कहा कि COVID-19 महामारी एक अभूतपूर्व वैश्विक संकट था, जिसके चलते विश्वभर के विश्वविद्यालयों को मजबूरन ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली अपनानी पड़ी थी। यह छात्रों की व्यक्तिगत पसंद नहीं बल्कि परिस्थितियों की अनिवार्यता थी। ऐसे में कई वर्षों बाद छात्रों पर प्रतिगामी नियम लागू करना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।

पहले से कठोर प्रक्रिया से गुजरते हैं FMGs

डीएमए इंडिया का कहना है कि विदेशी चिकित्सा स्नातकों को भारत में चिकित्सा अभ्यास की अनुमति पाने के लिए पहले से ही कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इनमें फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन FMGS या NExT परीक्षा और अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। संगठन के अनुसार ये प्रक्रियाएं डॉक्टरों की योग्यता और दक्षता की पर्याप्त जांच करती हैं। इसके बावजूद अतिरिक्त नियम लागू करना छात्रों के करियर को अनिश्चितता में डाल सकता है।

देशभर में बढ़ रहा विरोध

डीएमए इंडिया के अनुसार इस फैसले के खिलाफ देशभर में चिकित्सा समुदाय और छात्रों के बीच व्यापक विरोध देखने को मिल रहा है। कई छात्र संगठनों और मेडिकल पेशेवरों ने भी इस निर्णय को अव्यावहारिक बताया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि एनएमसी इस नोटिस को जल्द वापस नहीं लेता है तो विरोध और व्यापक स्तर पर किया जाएगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से प्रमुख मांगें

डीएमए इंडिया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • एनएमसी द्वारा जारी नोटिस को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
  • महामारी से प्रभावित छात्रों को विशेष छूट (Exemption) प्रदान की जाए।
  • छात्रों पर पिछली तारीख से नए नियम लागू न किए जाएं।
  • FMGE/NExT और अनिवार्य इंटर्नशिप को अंतिम और पर्याप्त मूल्यांकन माना जाए।

संगठन ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस मामले में जल्द हस्तक्षेप कर प्रभावित छात्रों को राहत देगी और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उचित निर्णय लेगी।

 


 

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