आयुष्मान योजना से मिला नया जीवन: सिम्स में जटिल सर्जरी से 24 वर्षीय युवक का वर्षों पुराना बंद जबड़ा खुला
www.healthbhaskar.com/ रायपुर /29/07/2026. शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध सिम्स अस्पताल, बिलासपुर ने एक दुर्लभ और जटिल शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 24 वर्षीय युवक को नया जीवन दिया है। बचपन से बंद जबड़े की समस्या से जूझ रहे युवक का आधुनिक तकनीक से सफल ऑपरेशन किया गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उसे यह पूरा उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।
मुंगेली जिले के अमली कापा निवासी युवक बचपन में लगी चोट के कारण बाइलेटरल टेम्पोरो-मैंडिबुलर जॉइंट (B/L TMJ) एंकिलोसिस से पीड़ित था। इस बीमारी के कारण उसका निचला जबड़ा अविकसित रह गया था और वह वर्षों तक सामान्य रूप से मुंह नहीं खोल पा रहा था। भोजन के नाम पर वह केवल तरल आहार ही ले पाता था, जिससे कुपोषण और शारीरिक कमजोरी का भी शिकार हो गया। निजी अस्पतालों में उपचार का खर्च तीन लाख रुपये से अधिक होने के कारण वह इलाज नहीं करा सका।
सिम्स अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तृत जांच, रक्त परीक्षण, सीबीसीटी एवं अन्य रेडियोलॉजिकल जांच के बाद ऑपरेशन की योजना बनाई। मरीज का मुंह पूरी तरह बंद होने के कारण पहले ट्रेकियोस्टॉमी कर श्वास नली स्थापित की गई। इसके बाद 4 जून 2026 को लगभग छह से सात घंटे तक चली जटिल सर्जरी में डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस तकनीक का उपयोग कर अविकसित निचले जबड़े को धीरे-धीरे सामान्य आकार देने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सर्जरी के बाद मरीज को एक सप्ताह तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे डिस्ट्रैक्शन उपकरणों के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में नियमित फॉलोअप के दौरान उसका मुंह खुलना शुरू हो गया है और वह सामान्य जीवन की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
यह जटिल ऑपरेशन दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश तथा उनकी टीम के सदस्यों डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी किनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे और डॉ. सोनल पटेल ने सफलतापूर्वक किया। निश्चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम तथा रेडियोडायग्नोसिस विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने भी उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि दंत एवं मुख रोग केवल दांतों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका प्रभाव व्यक्ति के पोषण, बोलने की क्षमता, चेहरे के विकास और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि सिम्स में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के माध्यम से ऐसे जटिल मामलों का भी सफल उपचार किया जा रहा है।
चिकित्सक सह अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने लोगों से अपील की कि बचपन से जबड़ा बंद रहने जैसी दुर्लभ समस्याओं को नजरअंदाज न करें और समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर उपचार कराएं। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
