सिकल सेल पीड़ित बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर, अम्बेडकर अस्पताल रायपुर में 16 फरवरी से शुरुआत
Healthbhaskar.com: रायपुर, 13 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ में सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण एवं बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग द्वारा विशेष दवाई वितरण, स्वास्थ्य जांच एवं न्यूमोकोकल टीकाकरण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष शिविर 16 फरवरी 2026 से 23 फरवरी 2026 तक विभाग की नियमित ओपीडी समयावधि में संचालित की जाएगी।
सिकल सेल रोग: एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती
सिकल सेल रोग एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जो विशेष रूप से आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है। इस रोग में लाल रक्त कोशिकाओं का आकार सामान्य न होकर सिकल के समान हो जाता है, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को बार-बार दर्द, एनीमिया, संक्रमण, अंग क्षति और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ उन राज्यों में शामिल है जहाँ सिकल सेल रोग की व्यापकता अधिक है। राज्य सरकार एवं चिकित्सा संस्थान इस रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान एवं उपचार के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इसी कड़ी में अम्बेडकर अस्पताल द्वारा आयोजित यह विशेष शिविर सिकल सेल पीड़ित बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होने वाला है।
शिविर का उद्देश्य और मुख्य लक्ष्य
इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य सिकल सेल रोग से पीड़ित बच्चों को समय पर उपचार, नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता एवं संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करना है। शिविर के दौरान बच्चों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया जाएगा तथा रक्त जांच, संक्रमण जांच एवं अन्य आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किए जाएंगे। इसके साथ ही न्यूमोकोकल वैक्सीन का टीकाकरण किया जाएगा, जो सिकल सेल रोगियों के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। यह वैक्सीन निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और सेप्सिस जैसे घातक संक्रमणों से बचाव में सहायक होती है, जिनका खतरा सिकल सेल मरीजों में सामान्य बच्चों की तुलना में कहीं अधिक रहता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा समग्र देखभाल
बाल्य एवं शिशु रोग विभाग की विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा मरीजों की संपूर्ण जांच की जाएगी। प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपचार योजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही अभिभावकों को सिकल सेल रोग के प्रबंधन, पोषण संबंधी सावधानियाँ, संक्रमण से बचाव के उपाय एवं नियमित फॉलो-अप की महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिकल सेल रोगियों के लिए केवल दवा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समुचित परामर्श, पोषण प्रबंधन, नियमित टीकाकरण एवं जीवनशैली सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। यही कारण है कि शिविर में चिकित्सा परामर्श के साथ-साथ स्वास्थ्य शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर का संदेश
अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने शिविर की जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल सिकल सेल रोगियों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे निर्धारित तिथियों के दौरान अपने बच्चों को अवश्य शिविर में लेकर आएं, ताकि समय पर दवा, जांच एवं टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सिकल सेल रोग एक दीर्घकालिक समस्या है, लेकिन समय पर उपचार एवं नियमित चिकित्सकीय निगरानी से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अस्पताल प्रशासन भविष्य में भी ऐसे शिविरों के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सिकल सेल नियंत्रण कार्यक्रम में अहम योगदान
यह शिविर राज्य सरकार द्वारा संचालित सिकल सेल नियंत्रण कार्यक्रम के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करता है। सरकार का उद्देश्य सिकल सेल रोग की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार एवं रोकथाम के माध्यम से इससे होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर को कम करना है। अम्बेडकर अस्पताल जैसे तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ पर उन्नत जांच सुविधाएँ, अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सक एवं आधुनिक उपचार संसाधन उपलब्ध हैं।
न्यूमोकोकल टीकाकरण का विशेष महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार सिकल सेल रोगियों में प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिससे उन्हें गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। न्यूमोकोकल वैक्सीन ऐसे संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करने में अत्यंत प्रभावी है। इस शिविर के माध्यम से अधिक से अधिक बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाकर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।
अभिभावकों के लिए जागरूकता अभियान
शिविर के दौरान अभिभावकों को रोग की प्रकृति, लक्षण, उपचार प्रक्रिया एवं सावधानियों के विषय में विस्तार से बताया जाएगा। जागरूकता सत्रों के माध्यम से उन्हें यह समझाया जाएगा कि नियमित दवा सेवन, समय पर टीकाकरण और संतुलित आहार से बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। अम्बेडकर अस्पताल की यह पहल समाज के अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। इस प्रकार के विशेष शिविर न केवल रोगियों को तत्काल लाभ पहुँचाते हैं, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
