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AIIMS रायपुर में CZACBICON 2026 का शुभारंभ, उन्नत मेडिकल वर्कशॉप से विशेषज्ञों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

Healthbhaskar.com: रायपुर, 12 फरवरी 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान। एम्स रायपुर के बायोकेमिस्ट्री (जैवरसायन) विभाग में प्रथम केंद्रीय क्षेत्रीय ACBICON सम्मेलन CZACBICON 2026 का शुभारंभ एडवांस्ड हैंड्स-ऑन वर्कशॉप के साथ भव्य रूप से किया गया। यह सम्मेलन उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को सम्मिलित करते हुए केंद्रीय क्षेत्र के चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण शैक्षणिक मंच साबित हो रहा है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों, उन्नत जांच पद्धतियों तथा अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान हेतु आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में चारों राज्यों से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और मेडिकल छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीकों पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को CD34 Enumeration, T, B एवं NK Cell Analysis, Micro-RNA Detection, Serum Protein Electrophoresis तथा Immunofixation जैसी अत्याधुनिक जांच तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। ये सभी तकनीकें ऑटोइम्यून बीमारियों, इम्यूनो-कॉम्प्रोमाइज़्ड मरीजों, कैंसर डायग्नोसिस तथा बाल एवं वयस्क रोगियों के उपचार प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एम्स रायपुर का जैवरसायन विभाग पिछले कई वर्षों से इन विशिष्ट जांचों का संचालन कर रहा है और क्षेत्र में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं को मजबूती प्रदान कर रहा है।

प्रशिक्षण से पूर्व प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी

कार्यशाला के प्रारंभ में डॉ. रचिता नंदा एवं डॉ. सुप्रवा पटेल ने प्रतिभागियों को विभिन्न जांच तकनीकों के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SOP) से अवगत कराया गया। उन्होंने जांच प्रक्रियाओं की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि, तकनीकी सावधानियाँ, संभावित त्रुटियाँ और गुणवत्ता नियंत्रण पर विस्तृत जानकारी भी साझा की है। इस सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को व्यावहारिक सत्र से पूर्व मानसिक एवं तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार करना था, जिससे प्रशिक्षण अधिक प्रभावी एवं सुरक्षित हो सके।

अनुभवी फैकल्टी द्वारा संचालित व्यावहारिक सत्र

कार्यशाला के सभी व्यावहारिक सत्रों का संचालन विभाग की अनुभवी फैकल्टी डॉ. सीमा शान, डॉ. डी. एल. गुप्ता, डॉ. नेहा वर्मा एवं डॉ. विभा सकारे,डॉ. सुशील कुमार रामदासी द्वारा किया गया। मुंबई से बेकमैन कूल्टर, सीनियर एप्लीकेशन साइंटिस्ट सम्मेलित हुए,तथा उन्होंने ने फ्लो साइटोमेट्री आधारित जांच प्रक्रियाओं में तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

चार राज्यों के प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ से आए प्रतिभागियों ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सभी प्रतिभागियों को व्यक्तिगत रूप से जांच प्रक्रियाएं करने का अवसर मिला, जिससे Hands-on Learning को वास्तविक अर्थों में साकार किया गया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उच्च स्तरीय, व्यावहारिक, वैज्ञानिक एवं अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों की निरंतरता की आवश्यकता हेतु ध्यान आकर्षित किया गया।

समापन सत्र में उत्कृष्ट योगदान को मिली सराहना

कार्यशाला के समापन अवसर पर आयोजित वैलिडिक्टरी सत्र में प्रो. (डॉ.) एली महापात्रा, आयोजन अध्यक्ष, विभागाध्यक्ष जैवरसायन एवं डीन (अकादमिक), एम्स रायपुर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्हें प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक दक्षता, अनुसंधान एवं रोग प्रबंधन क्षमता को सशक्त बनाती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, फैकल्टी सदस्यों एवं आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई प्रेषित की।

AIIMS रायपुर की अकादमिक उत्कृष्टता की सराहना

लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ,एम्स रायपुर ने जैवरसायन विभाग एवं आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि CZACBICON 2026 जैसे शैक्षणिक आयोजन क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का यह प्रयास अकादमिक उत्कृष्टता, क्षमता निर्माण एवं एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सर्विसेस को सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कदम है।

चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा

CZACBICON 2026 का पहला दिन चिकित्सा शिक्षा एवं शोध क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी उन्नयन और व्यावहारिक दक्षता की नई दिशा तय करता है। इस सम्मेलन से एडवांस डायग्नोस्टिक ,फ्लो साईट्रोमेट्री ,इम्मुनोलॉजी, ऑटोइम्यून बीमारियां ,क्लीनिकल बायोकेमिस्ट्री,एवं चिकित्सा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की दक्षता भविष्य में और बढ़ेगी।

 


 

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